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16 January 2011

मिले सुर मेरा तुम्हारा - नया बनाम पुराना

"मिले सुर मेरा तुम्हारा" इस गीत को बचपन में दूरदर्शन पर अक्सर देखा करता था.अभी इसका नया वर्ज़न भी आया है.जिसके बारे में फेसबुक पर प्रमोद जोशी जी से मालूम चला.निजी रूप से मुझे पुराना वाला ही ज्यादा अच्छा लगता है .आप भी देखिये और अपनी राय दीजिये.

पहले  देखिये पुराना ओरिजनल वीडियो जो दूरदर्शन पर कभी आया करता था-

                                                                   

और अब देखिये ये नया वाला-
    

                                                                       
मेरे अपने विचार से नया वाला वीडियो बदलते भारत की तस्वीर प्रस्तुत ज़रूर करता है पर पुराने वीडियो को सुनने में मिठास ज्यादा मालूम पड़ती है.
आपका क्या कहना है?

14 comments:

Alpana Verma said...

मुझे भी वही पुराना वाला गीत अधिक मधुर लगता है.

Alpana Verma said...

नए संस्करण में कृत्रिमता अधिक है...

रश्मि प्रभा... said...

old is gold forever

Saba Akbar said...

मेरी पसंद भी आपसे और अल्पना जी से अलग नहीं है...

Kailash Sharma said...

पुराना गीत बेहतर है..

रचना दीक्षित said...

पुराना गीत बेहतर है..

डॉ. मोनिका शर्मा said...

बेशक पुराना वाला.....

संजय भास्‍कर said...

पुराना गीत बेहतर है..

निवेदिता श्रीवास्तव said...

नया वाला तो रीमिक्स ही लग रहा है ..

vandan gupta said...

नया नौ दिन पुराना सौ दिन्।

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

वैसे तो मुझे पुराना ज्यादा अच्छा लगता है पर नया भी एक अलग स्वाद दे रहा है ... नए वाले में चमक-धमक ज्यादा है पर पुराना ज्यादा कलात्मक है ....

Rahul Singh said...

समय के साथ रुचि बदलती है और अब शायद बहुमत नये के पक्ष में हो, पुराना अब भी आकर्षक है.

यशवन्त माथुर (Yashwant R.B. Mathur) said...

आप सभी की अनमोल राय के लिए धन्यवाद.

वाणी गीत said...

मुझे भी पुराना ही ज्यादा मधुर लगता है !