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18 August 2011

अपनी अपनी किस्मत

एक तरफ -
लाड़
नाज़ भी नखरे भी
सोने के बिस्तर पर सोना
मोबाइल और बाइक को झगड़ना
फर्जी ख्यालों मे उड़ना
और फेल होना लगातार
कई साल। 
आँख पर
काला चश्मा लगाए चलना
काली जुबां का कदमताल करना
और एक तरफ-
सड़क के बीचों बीच
फुटपाथ पर 
हथेली पर अपनी इज्ज़त
और जान  लेकर
एक चादर मे सिमट कर
हर मौसम मे
उघाड़े बदन
दो मीठे बोल बोलना
आपस मे। 
दिन मे पेट की
रिक्शा चलाना
और रात को
ऊंची स्ट्रीट लाइट की
मंद रोशनी मे पढ़ना
फिर भी
सफलता का उच्च
शिखर चूमना
यही है
अपनी अपनी किस्मत!

30 comments:

SANDEEP PANWAR said...

वाह री किस्मत

दिगम्बर नासवा said...

मिझे लगता है किस्मत के साथ कहीं न कहीं महनत की भी बात है ... अच्छा फर्क बताया है आपने ...

Jyoti Mishra said...

Fantastic description of contrasting situations.
There r few who have everything but they don't care about it and where as some r so magical that in spite of odd conditions they manage to do miracles.

Nice write up !!

Kailash Sharma said...

बहुत मर्मस्पर्शी प्रस्तुती..बहुत सुन्दर

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

जितना पैसा मिलते जाता है, इंसान उतना ही जानवर बनते जाता है ...
अच्छी रचना ...

सागर said...

kismat.... bas kismat hoti hai... nice post....

Shikha Kaushik said...

यशवंत जी -आप hameshaa एक अलग ही भावनात्मक विषय चुनते हैं अपनी रचना हेतु .इससे यह भी प्रकट होता है कि आपका जीवन दर्शन विस्तृत है .आज हम सभी ke लिए यह जरूरी है कि हम अपने परिवेश में जिस से भी हो आदर्श की प्रेरणा ले और परस्थितियों से विचलित huye बिना अपने लक्ष्य की ओर बढ़ें .sarthak अभिव्यक्ति .बधाई .
blog paheli no. 1

Dorothy said...

बेहद सटीक और सार्थक अभिव्यक्ति. आभार.
सादर,
डोरोथी.

डॉ. मोनिका शर्मा said...

किस्मत भी...और हमारे समाज की विडम्बना भी.... बेहतरीन कविता

monali said...

Ye hai kismat banana.. sundar bhav :)

Amit Chandra said...

सही कहा यही है अपनी अपनी किस्मत।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

किस्मत तो होती ही है पर इसमें परिश्रम कि बात भी है ...अच्छी प्रस्तुति

ज्योति सिंह said...

kismat kab kahan chamk jaaye kah nahi sakte .ati sundar rachna

Shalini kaushik said...

सार्थक प्रस्तुति बधाई

.
वह दिन खुदा करे कि तुझे आजमायें हम .

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

यशवंत जी

क्या बात है … बड़े-बड़ों की छुट्टी कर देंगे आप कविता में अब ।
एक तरफ-
सड़क के बीचों बीच
फुटपाथ पर
हथेली पर अपनी इज्ज़त
और जान लेकर
एक चादर मे सिमट कर
हर मौसम मे
उघाड़े बदन
दो मीठे बोल बोलना
आपस मे।
दिन मे पेट की
रिक्शा चलाना
और रात को
ऊंची स्ट्रीट लाइट की
मंद रोशनी मे पढ़ना

मार्मिक चित्रण किया है आपने …
बस, ऐसों को अपनी निष्ठा , लगन , संतुष्टि और मेहनत का प्रतिफल मिले … उनके साथ अन्याय न हो … मेरी तो यही कामना रहती है ।

और भी श्रेष्ठ सृजन हो आपकी लेखनी से …
मंगलकामनाओं सहित
-राजेन्द्र स्वर्णकार

sushma verma said...

अपनी- अपनी किस्मत है.... अच्छी रचना....

Anupama Tripathi said...

कल-शनिवार 20 अगस्त 2011 को आपकी किसी पोस्ट की चर्चा नयी-पुरानी हलचल पर है |कृपया अवश्य पधारें.आभार.

Dr Varsha Singh said...

बड़ी ही सार्थक प्रस्तुति ....

सदा said...

बहुत ही गहन भावों का समावेश हर पंक्ति में ...बधाई ।

Anita said...

किस्म्त पलटते देर नहीं लगती.. काली जुबां का भी असर होता है और मीठे बोल का भी.. बहुत सुंदर चित्रण!

Unknown said...

नमस्कार....
बहुत ही सुन्दर लेख है आपकी बधाई स्वीकार करें

मैं आपके ब्लाग का फालोवर हूँ क्या आपको नहीं लगता की आपको भी मेरे ब्लाग में आकर अपनी सदस्यता का समावेश करना चाहिए मुझे बहुत प्रसन्नता होगी जब आप मेरे ब्लाग पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएँगे तो आपकी आगमन की आशा में........

आपका ब्लागर मित्र
नीलकमल वैष्णव "अनिश"

इस लिंक के द्वारा आप मेरे ब्लाग तक पहुँच सकते हैं धन्यवाद्
वहा से मेरे अन्य ब्लाग लिखा है वह क्लिक करके दुसरे ब्लागों पर भी जा सकते है धन्यवाद्

MITRA-MADHUR: ज्ञान की कुंजी ......

Anonymous said...

very nice.....keep it up.

निवेदिता श्रीवास्तव said...

मर्मस्पर्शी प्रस्तुती.........

Maheshwari kaneri said...

गहन अनुभूति के साथ सुन्दर प्रस्तुति...

रेखा said...

गंभीर विचारों से ओतप्रोत .....सार्थक रचना

सु-मन (Suman Kapoor) said...

baikul sahi likha hai .kismat apni apni

Amrita Tanmay said...

सफलता का असली स्वाद इसी में है . बहुत सुन्दर रचना .

G.N.SHAW said...

अपनी - अपनी किस्मत , सभी को जीवन में कुछ प्राप्त करने के लिए एक चांश मिलते है !

सुनीता शानू said...

और कितनी देर सोयेगें आप भी चले आयें ब्लॉगर मीट में नई पुरानी हलचल

यशवन्त माथुर (Yashwant R.B. Mathur) said...

आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद!