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22 August 2011

तेज़ रफ्तार मे चलते हुए...........

तेज़ रफ्तार मे चलते हुए  
जाने अनजाने
कभी कभी आ जाते हैं
कुछ टेड़े मेड़े मोड़
जिनके तीखे ,अंधे
घुमाव का
नहीं होता अंदाज़ा
आखिर टकराना
होता ही है 
गिरना होता ही है
झेलना पड़ता है
अनचाहा
क्षणिक जड़त्व
झेलना पड़ता है
जगह जगह
खरोचों को 
ज़ख़्मों को
हर बार मिलती है
कभी समझ न आने वाली सीख
संतुलित हो कर चलने की।

28 comments:

sushma verma said...

गहन चिंतन करवाती रचना.....

Anupama Tripathi said...

ठीक लिखा है ...जीवन के मोड़ पर सवाधानी रखना आवश्यक है ...और रक्तर पर तो ख़ास तौर से ...!!
सीख देती हुई सुंदर रचना ....

Kunwar Kusumesh said...

मुबारक हो जन्माष्टमी.

Maheshwari kaneri said...

हर बार मिलती है
कभी समझ न आने वाली सीख
संतुलित हो कर चलने की।......सुन्दर भाव सुन्दर अभिव्यक्ति...

काव्य संसार said...

बहुत अच्छी रचना |

इस नए ब्लॉग में पधारें |
काव्य का संसार

Kailash Sharma said...

बहुत सारगर्भित प्रस्तुति..जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !

Dr.Sushila Gupta said...

हर बार मिलती है
कभी समझ न आने वाली सीख
संतुलित हो कर चलने की।

mathurji,
namaskar,


sahee kaha aapne,har thokar ek sabk de jati hai

aapka bahut abhar.

Deepak Saini said...

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें

डॉ. मोनिका शर्मा said...

हर बार मिलती है
कभी समझ न आने वाली सीख
संतुलित हो कर चलने की।

बेहतरीन रचना....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।

Dr (Miss) Sharad Singh said...

भावों और शब्दों का सुंदर संयोजन....

Shalini kaushik said...

हर बार मिलती है
कभी समझ न आने वाली सीख
संतुलित हो कर चलने की।
बिलकुल sahi kahaa yashwant jee .
sundar प्रस्तुति krishn janmashtmi kee bahut bahut shubhkamnayen

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

मनुष्य ठोकरों से ही सीखता है !

वाणी गीत said...

हर बार मिलती है
कभी समझ न आने वाली सीख
संतुलित हो कर चलने की।
हर ठोकर कुछ सिखाती तो है , सीखे या नहीं सीखें , ठोकर खाने वाले की मर्जी !
गहन चिंतन !

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आज 23 - 08 - 2011 को आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है .....


...आज के कुछ खास चिट्ठे ...आपकी नज़र .तेताला पर
____________________________________

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

ज़िंदगी के मोड़ पर संतुलन बनाना पड़ता है ..अच्छी प्रस्तुति

अजय कुमार said...

aadamee galtee karke seekhataa hai

Amrita Tanmay said...

उत्कृष्ट कविता,उत्तम सीख. शुभकामना.

Unknown said...

खूबसूरत बात कही है यशवंत जी

vandan gupta said...

सुन्दर व सारगर्भित रचना।

वीना श्रीवास्तव said...

कभी-कभी तेज रफ्तार में आने वाले मोड़ आखिरी भी साबित हो जाते हैं...जिंदगी की रफ्तार में भी संतुलन और नियंत्रण बहुत जरूरी है...
बहुत बढ़िया...

Shikha Kaushik said...

anubhav से ही हम सही kaam करना सीखते हैं .आभार
ARE YOU READY FOR BLOG PAHELI -2

Minakshi Pant said...

सुन्दर सीख देती खूबसूरत रचना |

Anita said...

हर बार मिलती है
कभी समझ न आने वाली सीख
संतुलित हो कर चलने की।

मानव यहीं तो भूल करता है... भूलने की बीमारी है उसे... सुंदर कविता !

Jyoti Mishra said...

This happens daily... without exception.
We need to learn, but Alas as always we don't :D

Pratik Maheshwari said...

हाँ ठोकर से सीख लेना भी ज़िन्दगी का एक नियम ही है.. सही भाव!

यशवन्त माथुर (Yashwant R.B. Mathur) said...

आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद!

संजय भास्‍कर said...

प्रेरक रचना के लिए बधाई।