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25 August 2011

सवाल

हर पल
हर कहीं
घर मे या
घर के बाहर
एकांत मे
या किसी के साथ
किसी भीड़ मे
कहीं आते हुए
कहीं को जाते हुए
किसी से बात करते हुए
खुद को समझाते हुए
कुछ लिखते हुए
कुछ पढ़ते हुए
कुछ न कुछ करते हुए 
जेहन मे उठते हैं
अनेकों सवाल
न जाने क्यों?

30 comments:

Suresh kumar said...

बहुत ही सुन्दर सवाल ....

दिगम्बर नासवा said...

सवाल सवाल सवाल ... ये सवाल ही तो हैं जो जीने नहीं देते ... अच्छी रचना है ...

sushma verma said...

ये जाने क्यों? का ही जवाब सभी तलाश रहे है... सुन्दर अभिवयक्ति....

Arvind kumar said...

ये जवाब ना जाने कब मिलेंगें ?????

Dr Varsha Singh said...

सार्थक लेखन के साथ विचारणीय प्रश्न- भी ..

सागर said...

sawalo se ghri jindgi.... sundar rachna...

Sawai Singh Rajpurohit said...

सुन्दर और बेहतरीन कविता

Kailash Sharma said...

ज़िंदगी खुद एक सवाल है..बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

Unknown said...

दुनियां करे सवाल तो हम क्या जवाब दे ? मगर अपने सवाल का जवाब दुनिया जरूर देगी पूछिए तो , शुभकामनाये

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

अच्छे सवाल किये हैं आपने।

Shikha Kaushik said...

ये प्रश्न भी बहुत खूब है .बधाई
BHARTIY NARI

Jyoti Mishra said...

we have questions at every corners of our lives :)
ur lines depict the same beautifully
Nice read !!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

यथार्थ को कहती अच्छी अभिव्यक्ति

डॉ. मोनिका शर्मा said...

सुन्दर अभिव्यक्ति.....

Anupama Tripathi said...

कल शनिवार २७-०८-११ को आपकी किसी पोस्ट की चर्चा नयी-पुराणी हलचल पर है ...कृपया अवश्य पधारें और अपने सुझाव भी दें |आभार.

Maheshwari kaneri said...

ये सुन्दर सवाल सच में लाजवाब है..

Anita said...

जिस दिन सारे सवाल गिर जाते हैं भीतर बुद्धत्व का जन्म होता है उससे पहले यही तो एकमात्र पूंजी हैं...

सदा said...

बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

Anonymous said...

बहुत ही सुन्दरता से गहरे यतार्थ को शब्द दिए हैं ..........शानदार|

Anonymous said...

इन्ही सवालों का जवाब ढूंढते ही जीवन बीत जाता है |

रुनझुन said...

अरे वाह अंकल! ऐसा तो मेरे साथ भी रोज़ होता है....

निवेदिता श्रीवास्तव said...

ये सवाल और इनके उत्तर की तलाश ही तो जीवन है ..... शुभकामनायें !

ज्योति सिंह said...

bahut hi achchhi rachna ,janm -mritiyu hi sawal hai ,baki ki kya kahe ,ek gana yaad aa raha hai -duniya banane wale kahe ko duniya banai ,yahan to srishti ki sanranchna par hi sawal uth gaye .

ज्योति सिंह said...

aapke blog par aana achchha laga ,dhun bahut pyari hai lag raha tha sunti rahoon .

Ankit pandey said...

बहुत खूब..सुन्दर रचना, प्रभावशाली पंक्तियाँ।

www.navincchaturvedi.blogspot.com said...

यशवंत भाई विगत महीनों से आप की प्रस्तुतियों से आभास हो रहा है कि आपका कविमन किसी गंतव्य को पाने को अत्यधिक आतुर है। प्रश्नों का यह क्रम उसी संभावित गंतव्य की तरफ बढ़ता लक्षित हो रहा है।

सु-मन (Suman Kapoor) said...

inhi swalon ke jwab dhudhne me hi to jindagi beet jati hai...

Amrita Tanmay said...

सुन्दर अभिव्यक्ति के लिये बधाई स्वीकारें।

यशवन्त माथुर (Yashwant R.B. Mathur) said...

आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद!

Unknown said...

खुबसूरत रचना,सादर .