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17 September 2011

कुछ लिखना है

कुछ लिखना है
किसी के लिये
एक वादे के लिये
जो अभी अभी किया है
किसी से।
वो कहीं दूर
कर रहा है इंतज़ार
मेरे गुमनाम शब्दों का
न जाने क्यों?
न कोई चाह;
न कोई इच्छा ;
न कोई स्वार्थ;
फिर भी अक्सर
मन के दरवाजे पर
एक दस्तक देकर
वो  
पकड़ा देता है
एक विषय
और कहता है
कुछ लिखो
असमर्थ सा हूँ
कल्पनाशक्ति के
उस पार जाने मे
फिर भी सोच रहा हूँ
कुछ लिखने को
उस वादे के लिए
जो अभी अभी किया है
किसी से।

36 comments:

निवेदिता श्रीवास्तव said...

बस ऐसे ही वादे पूरे होते रहें ज़िन्दगी सहज हो जायेगी .... शुभकामनायें!

मीनाक्षी said...

बहुत खूब...यह है आज की कविता का कमाल...कवि मन सादगी से अपने मन के भाव अभिव्यक्त कर देता है...

रविकर said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति ||

आपको हमारी ओर से

सादर बधाई ||

डॉ. मोनिका शर्मा said...

लेखन चलता रहे इससे अच्छा क्या है.... सुंदर कविता ....

Sapna Nigam ( mitanigoth.blogspot.com ) said...

सुंदर रचना.

वाणी गीत said...

गुमनाम शब्दों क इन्तजार कर रह है कोई ...
लिखने की सार्थक और अधिक हो जति है , जब कोइ बेचैनी से पढ्न चाहत है ...
भावपूर्ण अभिव्यक्ति !

Unknown said...

अच्छी पंक्तिया लिखी है बधाई

meena said...

SUNDAR ABHIVYKATI ....

डॉ टी एस दराल said...

कम शब्दों में सुन्दर अभिव्यक्ति ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

वादा किया है तो निभाना तो पड़ेगा ही ... खूबसूरती से लिखा है ...

अवनीश सिंह said...

http://premchand-sahitya.blogspot.com/

यदि आप को प्रेमचन्द की कहानियाँ पसन्द हैं तो यह ब्लॉग आप के ही लिये है |

यदि यह प्रयास अच्छा लगे तो कृपया फालोअर बनकर उत्साहवर्धन करें तथा अपनी बहुमूल्य राय से अवगत करायें |

अवनीश सिंह said...

http://premchand-sahitya.blogspot.com/

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यदि यह प्रयास अच्छा लगे तो कृपया फालोअर बनकर उत्साहवर्धन करें तथा अपनी बहुमूल्य राय से अवगत करायें |

Maheshwari kaneri said...

बहुत सुन्दर वादा..दिल से निभाया..सुभकामनाए~..

Rajesh Kumari said...

antaraatma isi tarah prerit karti hai kuch likhne ke liye.man ke bhaavon ko achche shabdon me dhala hai.aur aabhar itna pyara music blog par lagaane ke liye.

Dr Varsha Singh said...

असमर्थ सा हूँ
कल्पनाशक्ति के
उस पार जाने मे
फिर भी सोच रहा हूँ
कुछ लिखने को
उस वादे के लिए
जो अभी अभी किया है
किसी से।

बहुत ही कोमल भावनाओं में रची-बसी खूबसूरत रचना के लिए आपको हार्दिक बधाई।

रश्मि प्रभा... said...

वाडे को निभाना है
मन को उतारना है
शब्दों के हमसफ़र के लिए ...

रजनीश तिवारी said...

कविमन की भावपूर्ण अभिव्यक्ति

Dr Varsha Singh said...

कल्पनाशक्ति के
उस पार जाने मे
फिर भी सोच रहा हूँ
कुछ लिखने को
उस वादे के लिए
जो अभी अभी किया है
किसी से।

एक अलग ही भाव-संसार में ले जाती सुंदर कविता !

Suresh kumar said...

वायदा निभाते रहना .....

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

बढ़िया प्रस्तुति...
सादर बधाई...

sushma verma said...

बहुत ही खुबसूरत पंक्तिया....

रेखा said...

वादा तो निभाना ही चाहिए .....

सदा said...

वाह ...बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

कभी कभी लिखना बहुत मुश्किल हो जीता है ... मैंने भी किया है महसूस !

Anita said...

अपने वादे को निभाते रहें और इसी तरह कुछ लिख लिख कर हमें पढ़वाते रहें... सुंदर कविता !

Dr (Miss) Sharad Singh said...

कुछ लिखना है
किसी के लिये
एक वादे के लिये
जो अभी अभी किया है
किसी से।
वो कहीं दूर
कर रहा है इंतज़ार
मेरे गुमनाम शब्दों का

बहुत बारीक-सी कहन...मन को छूने वाली...

Santosh Kumar said...

लिखने का वादा..जीवन की आशा..प्रेरक रचना..आभार.

Anonymous said...

लिखने वाले को तो बस विषय की तलाश रहती है और को है जो आपको विषय सुझा रहा है तो फिर हिचक कैसी बस लिखते रहिये|

दिगम्बर नासवा said...

ऐसे वादों को निभाना ही अच्छा होता है ... जीवन के वादे है ये ...

Kunwar Kusumesh said...

भावपूर्ण अभिव्यक्ति

अनुपमा पाठक said...

लेखनी अविराम चलती रहे!

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

क्या बात है
आपको पढना एक सुखद अनुभव है।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल कल 22 -09 - 2011 को यहाँ भी है

...नयी पुरानी हलचल में ...हर किसी के लिए ही दुआ मैं करूँ

Unknown said...

आपको मेरी तरफ से नवरात्री की ढेरों शुभकामनाएं.. माता सबों को खुश और आबाद रखे..
जय माता दी..

Kunwar Kusumesh said...

आपको नवरात्रि की ढेरों शुभकामनायें.

Udan Tashtari said...

भावपूर्ण रचना///