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02 October 2011

एक दिन का .....

एक दिन के सिद्दांत
एक दिन के आदर्श
एक दिन का सत्य
एक दिन की अहिंसा  
एक दिन खादी
एक दिन की श्रद्धा
एक दिन का स्मरण
आपके भजनों का
आपके त्याग का
सादगी का
विचारों का
एक दिन का
नख शिख अनुसरण
आपका
और बाकी दिन?

29 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

Unknown said...

सिर्फ वाद.. सिर्फ वाह.. सिर्फ टोपी और सिर्फ टोपी . यही तो है bapu के बाकी दिन

रजनीश तिवारी said...

एक दिन, वो भी दिखावा मात्र ....
पर एक खुशी है कि गांधी की प्रासंगिकता ख़त्म नहीं हुई ...
बापू हमेशा आदर्श बने रहेंगे ...

Jyoti Mishra said...

बाकी दीन वही दिखावटी श्रधा
और दिखावटी आदर्श !!

Beautifully written !!

Dr Varsha Singh said...

सादगी का
विचारों का
एक दिन का
नख शिख अनुसरण
आपका
और बाकी दिन?


वाह..क्या खूब ...कटाक्ष किया है...

Kavita Rawat said...

sach mein aaj yahi ekdini bukhar sa jagah-jagah chha jaata hai aur phir wahi dhaak ke teen paat...
bahut badiya kataksh....
Gandhi jayanti kee haardik shubhkamnayen!

मेरा मन पंछी सा said...

बहुत खूब कहा है आपने...
सिर्फ एक दिन बापू को याद करने से क्या होगा
हमें तो हर रोज उनके आदर्शो का पालन करना चाहिए

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

वाह! बहुत सार्थक तीखा प्रश्न... भेद गयी अंतस...
सादर...

Maheshwari kaneri said...

बहुत सुन्दर ..सही प्रश्न उठाया ..सिर्फ एक दिन बापू को याद करने से क्या होगा ...इस दिखावे से कुछ नहीं होगा..सार्थक रचना...

रेखा said...

सार्थक प्रश्न करती हुई सटीक प्रस्तुति ..

sushma verma said...

सटीक रचना....

रविकर said...

शुभकामनाएं||
बहुत ही बढ़िया ||
बधाई |

Udan Tashtari said...

बाकी दिन इसे भुनायेंगे...

Anita said...

एक दिन भी यदि दिल से स्मरण किया हो तो शेष दिन भी उसकी सुगंध हमें घेरे रहेगी...

सदा said...

बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

Chaitanyaa Sharma said...

बापू को नमन

सागर said...

behtreen prstuti....

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

एक दिन राम का बाकी रावण का ... सुन्दर कविता !

POOJA... said...

waah... sahi hamne unhe sirf ek din hi to de rakha hai... parantu aap baaki dino ki baat mat kijiye, ye insaan aapko sab gina dega...

Anonymous said...

वाह ...बहुत ही अच्‍छी बात कही है आपने ।

kanu..... said...

sach hai aur baki din?bahut hi acchi post

Anonymous said...

gandhi jayanti par ye bhent sundar hai.

डॉ. मोनिका शर्मा said...

और बाकी दिन?

बहुत बढ़िया शब्द चुने....

Amrita Tanmay said...

तान चदरिया सोये रहो..

यशवन्त माथुर (Yashwant R.B. Mathur) said...

आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद!

Anupama Tripathi said...

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल शनिवार .. 04-02 -20 12 को यहाँ भी है

...नयी पुरानी हलचलपर ..... .
कृपया पधारें ...आभार .

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बाकी दिन ??????
जनता का शोषण

अच्छी प्रस्तुति

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बाकी दिन ??????
जनता का शोषण

अच्छी प्रस्तुति

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बाकी दिन ?

जनता का शोषण

अच्छी रचना