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20 October 2011

तीन


आज प्रस्तुत हैं मेरी मम्मी की लिखी यह पंक्तियाँ --

सम से समता
निज से निजता 
एक से एकता
लघु से लघुता
प्रभु से प्रभुता
मानव से मानवता
दानव से दानवता
सुंदर से सुंदरता
जड़ से जड़ता
छल से छलता
जल से जलता
दृढ़ से दृढ़ता 
ठग से ठगता
कर्म से कर्मठता
दीन से दीनता
चंचल से चंचलता
कठोर से कठोरता
समझ से समझता
खेल से खेलता
पढ़ से पढ़ता
इस का विधाता
से रिश्ता होता
ये दिल जानता
ये गहरा नाता
गर समझना आता
अपना सब लगता
मन हमारा मानता
दर्द न होता
जग अपना होता
विधाता का करता
गुणगान शीश झुकाता
मानवधर्म का मानवता
से सर्वोत्तम रिश्ता
सेवा प्रार्थना होता
सबसे अच्छा होता
ये गहरा रिश्ता
अगर सबने होता
समझा ये नाता
दिलों मे होता
रामकृष्ण गर बसता
संसार सुंदर होता
झगड़ा न होता
विषमता से समता
आ गया होता
विधाता से निकटता
तब हो जाता
जग तुमसा होता
जय भू माता!

21 comments:

डॉ. मोनिका शर्मा said...

मानवधर्म का मानवता
से सर्वोत्तम रिश्ता
सेवा प्रार्थना होता
सबसे अच्छा होता
ये गहरा रिश्ता

बेहद सुंदर पंक्तियाँ ...

Satish Saxena said...

सुन्दर और अनूठी रचना ...
शुभकामनायें आपको !

कुमार राधारमण said...

हमारी सारी समस्याएं हमारी खुद की पैदा की हुई हैं। समाधान भी हमें ही ढूंढना होगा।

Jyoti Mishra said...

Fantastic... really adorable !

रविकर said...

रचना चर्चा-मंच पर, शोभित सब उत्कृष्ट |
संग में परिचय-श्रृंखला, करती हैं आकृष्ट |

शुक्रवारीय चर्चा मंच
http://charchamanch.blogspot.com/

Amrita Tanmay said...

सरल , सुन्दर रचना के लिए पूनम जी को बधाई.

सदा said...

सरल और सहज शब्‍दों में गहन भाव लिये सार्थक अभिव्‍यक्ति।

Anonymous said...

कुछ अलग हटकर लगा........शुभकामनायें|

मेरा मन पंछी सा said...

बहुत ही सुन्दर, सरल और बेमिसाल रचना है...

रेखा said...

खुबसूरत और लाजबाब .....बेहतरीन पंक्तियाँ

Pallavi saxena said...

सदा जी की बात से सहमत सरल सुंदर भाव लिए सार्थक अभिव्यक्ति

Amit Chandra said...

सरल शब्दों में आत्मविभोर कर देने वाली रचना.

www.navincchaturvedi.blogspot.com said...

यशवंत भाई आप को तो काव्य विरासत में मिला है| आप की माता जी को इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत बधाई |

दिगम्बर नासवा said...

बहुत ही सुन्दर शाश्वत प्रस्तुति ...

निवेदिता श्रीवास्तव said...

बेहद सुंदर पंक्तियाँ ........शुभकामनायें

संगीता पुरी said...

सटीक है ..

बहुत सुंदर प्रस्‍तुति !!

POOJA... said...

arey waah... Aunty ji ko namastey kahiyega...
n lines bahut hi sundar... bas inhi panktiyon jaisa aashirwaad ham bacchon par banae rakhen...

सु-मन (Suman Kapoor) said...

bahut sundar....

Maheshwari kaneri said...

बहुत ही सुन्दर, सरल और अनूठी रचना ...यशवंत लगता है तुम्हे लिखने का हूनर विरासत में मिला है| पूनम जी को इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत बधाई |...

यशवन्त माथुर (Yashwant R.B. Mathur) said...

आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद!

Jasmine Bhiduri said...

superb !