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28 November 2011

ड्राफ्ट

कितना अजीब सा होता है
एडिट मोड
जहां पूरा होने का
इंतज़ार करते मिलते हैं
कुछ सिमटे से
अधूरे ड्राफ्ट
ठीक वैसे ही
जैसे पिंजरे में कैद
कोई पंछी
फड़फड़ा रहा हो  
खुली हवा मे उड़ने को

दो दो तीन तीन लाइन के  
ढेर सारे ड्राफ्ट
जिन पर
अक्सर चली जाती है 
मेरी उछ्टती सी निगाह
लेकर
एक हल्की सी मुस्कान
देता हूँ
मौन दिलासा--

'चिंता मत करो
तुम डिलीट नहीं होगे
तुमको छपना है
अंश बनना है
आने वाली
किसी पोस्ट का'

आश्वस्ति सा भाव लिये
बेचारा ड्राफ्ट
रह जाता है कैद
एडिट मोड में

और न्यू पोस्ट पर
क्लिक करते ही
बजने लगता है
की बोर्ड का राग

नयी पोस्ट बन कर
पब्लिश भी हो जाती है
और ड्राफ्ट ....?
उसे करना है
अभी कुछ और
इंतज़ार  !



23 comments:

Maheshwari kaneri said...

बेचारे ड्राफ्ट की आत्म कथा, बहुत सुन्दर ठंग से प्रस्तुत किया है...बहुत खूब...

अनुपमा पाठक said...

हर ड्राफ्ट रौशनी में आएगा...
लिख गया है.. तो
अवश्य झिलमिलायेगा...

सदा said...

नयी पोस्ट बन कर
पब्लिश भी हो जाती है
और ड्राफ्ट ....?
उसे करना है
अभी कुछ और
इंतज़ार !
वाह ...बहुत बढि़या।

अरुण चन्द्र रॉय said...

यशवंत भाई... बिल्कुल नया विम्ब लेकर लिखी गई कविता है... सुन्दर..

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून said...

:)

निवेदिता श्रीवास्तव said...

बहुत खूब ......

Bharat Bhushan said...

पड़े हुए ड्राफ़्ट में बहुत संभावनाएँ होती हैं और पूर्णता की कोई परिभाषा नहीं होती. कविता के माध्यम से ड्राफ़्ट का पोर्ट्रेट खींच दिया है. सुंदर.

रश्मि प्रभा... said...

कितना अजीब सा होता है
एडिट मोड
जहां पूरा होने का
इंतज़ार करते मिलते हैं
कुछ सिमटे से
अधूरे ड्राफ्ट
ठीक वैसे ही
जैसे पिंजरे में कैद
कोई पंछी
फड़फड़ा रहा हो
खुली हवा मे उड़ने को... शानदार लेखन ... ड्राफ्ट अधूरे रहेंगे ही नहीं

मेरा मन पंछी सा said...

ड्राफ्ट की आत्मकथा ....
ऐसा भी होता है..आपकी यह पोस्ट पढ़कर तो मै ड्राफ्ट के बारे में सोचने लग गयी...
अच्छी प्रस्तुति...

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

क्या बात है, बिल्कुल नई बात..
बहुत सुंदर।

प्रेम सरोवर said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति है आपकी..। पढ़ना बहुत अच्छा लगा.।
समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आईयेगा,। धन्यवाद ।

मनोज कुमार said...

अरे वाह!
इस पर भी पोस्ट बन सकती है जो अभी तक है ड्राफ़्ट!

डॉ. मोनिका शर्मा said...

बेचारा ड्राफ्ट :( अच्छी पंक्तियाँ लिखी हैं कुछ अलग सी.....

Anju (Anu) Chaudhary said...

हम सब के मन का इतना बड़ा सच ....कैसे इतने सरल शब्दों में लिख दिया आने .....बहुत खूबसूरत ये आपक ''ड्राफ्ट''.......आभार के साथ

संजय भास्‍कर said...

सुन्दर सी प्रेरक रचना..बधाई !!

Rajeysha said...

kuchh khayaal draft shape me hi achhay lagte hain..
जस्ट डायल डॉट कॉम धोखाधड़ी, लूट खसोट Just Dial.com Scam/ Fraud

Anonymous said...

:-))

सदा said...

कल 30/11/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्‍वागत है, थी - हूँ - रहूंगी ....

Prakash Jain said...

wah...bahut sundar...

haha:-)

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

नए बिम्बों के साथ सुन्दर अभिव्यक्ति आदरणीय यशवंत जी...
सादर...

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

यशवंत जी,,.
सुंदर आयामों को दर्शाता ड्राफ्ट,..
ड्राफ्ट की सुंदर आत्मकथा,..बेहतरीन पोस्ट .
मेरे नए पोस्ट "प्रतिस्पर्धा"में .......

Soma Mukherjee said...

ha ha ha bahut rochak lekh...sach jaane kitne soch kate hue pankh liye baithi hai ki kabhi toh humare pankho mei bhi jaan bharo...delete toh nahi kiya par kabhi kabhi aapni kuch drafts ko dekh kar khud se kahti hu..hey bhagwaan yah kya likh rahi thhi tum...

Meeta Pant said...

Dilchasp !!