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01 November 2011

दुनिया गोल है (Post Number -250)

 (इस टाइमपास पोस्ट की शुरू की आठ लाइने  फेसबुक स्टेटस मे देने के लिए लिखी थी लेकिन बढ़ते बढ़ते यह इस ब्लॉग की 250 वीं पोस्ट बन कर यहाँ प्रस्तुत हैं। )


दुनिया गोल है
हम जहां से चलते हैं
वापस वहीं पर आना ही होता है
ठीक वैसे ही
जैसे दिन की शुरुआत
फेसबुक और ब्लॉग से होती है
और दिन का अंत भी
इसी को देखते हुए होता है

मन भटकता है कभी कभी
कुछ सोच कुछ ख्याल
की बोर्ड की
कभी मंथर कभी तेज़ गति से
स्क्रीन पर उतर आते हैं
स्याही से-
कागज़ के गंदे होने का
डायरी के भरने का
किसी काट पीट
ओवर राइटिंग का
कोई झंझट ही नहीं
सब कुछ साफ -
बेदाग सा नज़र आता है

लेकिन जब
होने लगता है
पलकों मे दर्द
चटकती हैं उँगलियाँ

चैट पर-
किसी के हैलो लिखते ही
वो थकान भी दूर हो जाती है
नए सिरे  से ऊर्जा
और गति मिल जाती है
की बोर्ड को

ठीक वैसे ही
जैसे दिन की शुरुआत के समय थी
फेसबुक और ब्लॉग पर । 

आखिर दुनिया गोल जो है :)

33 comments:

Anonymous said...

सही कहा आपने अब तो दिन की शुरुआत ऐसे ही होती है ये भी एक नशा सा हो गया है :-))

सदा said...

आखिर दुनिया गोल जो है ...

बहुत सही ...बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

सदा said...

कल 02/11/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है।

धन्यवाद!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

:):) वाकयी दुनिया गोल है ..

संगीता पुरी said...

चैट पर-
किसी के हैलो लिखते ही
वो थकान भी दूर हो जाती है
नए सिरे से ऊर्जा
और गति मिल जाती है
की बोर्ड को
ठीक वैसे ही
जैसे दिन की शुरुआत के समय थी
फेसबुक और ब्लॉग पर ।

आखिर दुनिया गोल जो है :)

सही है !!

संध्या शर्मा said...

सही कहा आपने दुनिया गोल है ...

Unknown said...

यशवंत कुछ नयी तरह से कहने का प्रयास अच्छा है प्रसंसनीय बधाई

babanpandey said...

ha ha ....yh baat to bahut se sach haibhai chhat की बधाई

Anita said...

स्याही से-
कागज़ के गंदे होने का
डायरी के भरने का
किसी काट पीट
ओवर राइटिंग का
कोई झंझट ही नहीं
सब कुछ साफ -
बेदाग सा नज़र आता है

स्याही से कागज गंदा होता है क्या.... यह तो कागज की किस्मत है कि वह पुडिया बनाने के काम नहीं आया किसी के दिल की धडकनों को अपने सीने पर संजोने के काम आया...

विभा रानी श्रीवास्तव said...

पलकों मे दर्द
चटकती हैं उँगलियाँ
चैट पर-
किसी के हैलो लिखते ही
वो थकान भी दूर हो जाती है
नए सिरे से ऊर्जा
हमें ,आपको या सभी को
ठीक वैसे ही
जैसे दिन की शुरुआत के समय थी
बिलकुल सही.... :)

Maheshwari kaneri said...

सच कहा .वाकयी दुनिया गोल है ..250वी पोस्ट के लिए बधाई...

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

क्या बात है, बहुत सुंदर

Prakash Jain said...

Is baar aapki kalam kaiyon ke bhaavon ko bayan kar rahi hai...

sundar...

www.poeticprakash.com

G.N.SHAW said...

सचमुच बहुत ही बैज्ञानिक तर्क ! badhayi

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
छठपूजा की शुभकामनाएँ!

POOJA... said...

250th pots ke liye congratulations...
n then ye post bhi har post ki tarah bahut hi acchhi hai...
aur to duniya gol hi hai aur hamesh agol hi rahegi...

Sonroopa Vishal said...

बिलकुल सही कहा!

Chaitanyaa Sharma said...

250वी पोस्ट के लिए बहुत बहुत बधाई......

डॉ. मोनिका शर्मा said...

आखिर दुनिया गोल जो है ... :)बहुत सुंदर .....

Asha Lata Saxena said...

सच में दुनिया गोल ही है |कहीं न कहीं बहुत समय बाद भी लोग मिल ही जाते हैं |अच्छी प्रस्तुति |
आशा

mridula pradhan said...

chaliye duniya gol hai.....aapne badi sunderta se sidh kar diya.

जयकृष्ण राय तुषार said...

भाई यशवंत जी बहुत सुन्दर कविता के लिए और मेरे ब्लॉग पर आने के लिए बधाई और आभार एक साथ

दिगम्बर नासवा said...

दुनिया सच में गोल है ... और चेट से दुबारा उर्जा आ जाती है .. दोनों बातें सच हैं बिलकुल ...

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

वाकई में दुनिया गोल है जहां से चलो वहीं पहुच जाते है..सुंदर पोस्ट..मेरी नई रचना देखे...

Pallavi saxena said...

aapne to sabhi ke man ki baat kahdi is nazar se to sahi main duniya gol hee hai badhiya apni si lagi aapki yh post abhaar...

संजय भास्‍कर said...

.250वी पोस्ट के लिए बधाई...

अरुण चन्द्र रॉय said...

बढ़िया कविता... २५०वि पोस्ट के लिए बधाई...

Anupama Tripathi said...

•आपकी किसी पोस्ट की हलचल है ...कल शनिवार (५-११-११)को nayi-purani halchal par ...कृपया अपने अमूल्य विचार ज़रूर दें .....!!!धन्यवाद

मेरा मन पंछी सा said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

सुन्दर... 250वी पोस्ट के लिए बधाई...
सादर...

आशा बिष्ट said...

आखिर दुनिया गोल जो है..पूरी कविता को समझा गए ये शब्द रचना

यशवन्त माथुर (Yashwant R.B. Mathur) said...

आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद!

अनुपमा पाठक said...

250वी पोस्ट के लिए बधाई!