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20 January 2012

खुशहाली ,चोट और चोर ......(मम्मी की 2 नयी कविताएं)

आज एक बार पुनः पढ़िये मम्मी की 2 नवीनतम कविताएं ---
 




खुशहाली  
हाथ खाली,पेट खाली,थाली खाली।
जेब खाली,आना खाली,जाना खाली।
फिर क्यों करते हो गैरों की दलाली।
फिर क्यों करते हो चोरों की रखवाली।
क्यों नहीं लाते हो भारत मे खुशहाली। ।

*

चोट और चोर

चोट भीतर घाव करता है,
चोर बाहर घाव करता है।

चोट का निशान मिटा नहीं करता है,
चोर दगाबाजी करता है।

चोट समय-समय पर दर्द दिया करता है,
चोर समय-समय पर माल उड़ाया करता है। ।

(पूनम माथुर)

44 comments:

सदा said...

दोनो ही रचनाएं बहुत अच्‍छी लगी ...आभार

Maheshwari kaneri said...

दोनो ही कविताएँ सुन्दर और सटीक भावो से ओत-प्रोत है..उनकी लेखनी को नमन..

संजय भास्‍कर said...

क्या बात है...दोनो ही रचनाएं बढ़िया लगी मम्मी जी प्रणाम कहिएगा....यशवंत भाई

रश्मि प्रभा... said...

माँ बहुत अच्छा लिखती हैं ... मैं कल्पना करती हूँ उनके बारे में ... उनका ब्लॉग बनाओ यशवंत

avanti singh said...

aap ki mummy ke hi gun aap me aaye hai :) tab hi aap bhi un ki tarh umda likhte hai,aap ki mummy ko bdhai dijiyega,bahut acha likhti hai wo...

vidya said...

बहुत बढ़िया...
convey my wishes and regards to her.

Roshi said...

bahut accha likha hai yashvantji.......

Roshi said...

very nice yashvant ji tell her to write more...........

Unknown said...

अच्छी रचना , प्रभावशाली बात

Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर और प्रभावी रचनाएँ...

अरुण चन्द्र रॉय said...

माता जी की दोनों कवितायेँ बेहतरीन हैं... रश्मि जी के आदेशानुसार उनका अलग ब्लॉग बनाइये...

Bharat Bhushan said...

'चोरों' पर अच्छी चोट की है बहन ने. पर ये चोर सुधरते ही नहीं.

RITU BANSAL said...

अपनी माताजी की रचनाओं को सम्मान देकर एक अच्छा काम किया है ..
दोनों ही कवितायें ज़िन्दगी का सच बयान करती हैं..
kalamdaan.blogspot.com

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

सटीक सार्थक प्रस्तुति,बहुत सुंदर रचना,बेहतरीन...
new post...वाह रे मंहगाई...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बढ़िया रचनाएँ ... गहन भाव लिए हुए .

Atul Shrivastava said...

अच्‍छी रचना।
व्‍यवस्‍था पर करारी चोट।
आपकी मम्‍मी जी को प्रणाम।

डॉ. मोनिका शर्मा said...

दोनों ही रचनाएँ बहुत सुंदर हैं......

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
--
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
सूचनार्थ!

Asha Lata Saxena said...

अच्छी भावपूर्ण रचनाएँ |सुन्दर शब्द चयन |
आशा

Kunwar Kusumesh said...

सुन्दर अभिव्यक्ति.

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

अच्छी रचनायें, वाह !!!

Amrita Tanmay said...

बहुत बढ़िया रचना पढवाने के लिए आभार..

Jeevan Pushp said...

बहुत बढ़िया रचना !
आभार !

प्रतिभा सक्सेना said...

वाह,बहुत अच्छा लिखा है !

यशवन्त माथुर said...

आंटी ! आपका संदेश मम्मी तक पहुंचा दिया है।

यशवन्त माथुर said...

ज़रूर सर! आपका यह संदेश मम्मी तक पहुंचा दिया है।

मेरा मन पंछी सा said...

आंटी जी ने बहुत अच्छा लिखा है ...
उन्हें प्रणाम कहिये...

induravisinghj said...

दोनों ही रचनाएँ,गहनता पूर्ण हैं।

Unknown said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

Anonymous said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति |

sheetal said...

Yashwant ji
aapki mummy ji ki likhi dono kavitain bahut sundar hain.
aapki mataji ko mera pranaam.

Anju (Anu) Chaudhary said...

वाह बेहद प्रभावशाली ...सटीक

sushila said...

चोर तो सदियों से चोट देते आए हैं। बाहरी चोट तो ठीक हो जाती है मगर दगाबाजी भुलाए नहीं भूलती।
मम्मी को नमन ।

Anonymous said...

bahut khoob
shaandar rachnaaye

Patali-The-Village said...

दोनों ही रचनाएँ सार्थक सन्देश दे रही हैं। धन्यवाद।

Kavita Rawat said...

doni hi rachnayen shikshaprad aur jiwan anubhav se paripurn hain..

G.N.SHAW said...

समसामयिक सुन्दर कविता ! बधाई

सूत्रधार said...

आपके इस उत्‍कृष्‍ठ प्रस्‍तुति का आभार ।

संध्या शर्मा said...

दोनो ही कविताएँ बहुत सुन्दर है..उनका बहुत -बहुत आभार...

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

बहुत सुंदर प्रस्तुति,भावपूर्ण अच्छी रचना,..
WELCOME TO NEW POST --26 जनवरी आया है....
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाए.....

दिगंबर नासवा said...

दोनों बेहतरीन रचनाये हैं ... सार्थक सटीक ...

Anonymous said...

nice poems :)

यशवन्त माथुर said...

आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद!

dinesh aggarwal said...

बहुत ही सुन्दर.......सराहनीय.....
कृपया इसे भी पढ़े-
नेता, कुत्ता और वेश्या

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