प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

वेब सर्च (Enter your keywords to search on web)

14 June 2012

अनकही बातें

कहीं रत जगे हैं 
कहीं अधूरी मुलाकातें हैं  
हवाओं की खामोशी में 
आती जाती सांसें हैं । 

डरता है कुछ कहने से 
मन की अजीब चाहतें हैं 
किसी कोने मे दबी हुई 
अब भी अनकही बातें हैं।

©यशवन्त माथुर©

15 comments:

ANULATA RAJ NAIR said...

बहुत सुन्दर यशवंत..
सस्नेह.

सदा said...

वाह ... बेहतरीन भाव संयोजन ...

Maheshwari kaneri said...

बहुत सुन्दर यशवन्त...सस्नेह

yashoda Agrawal said...

अनकही बातें.....
छुपी रहती है..
अक्सर...
हर किसी के
पारिवरिक जीवन में..
पर कविता के रूप में पढ़ी
पहली बार...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

कम शब्द, गहरी बात!

मेरा मन पंछी सा said...

वाह||||
लाजवाब
बहुत ही अच्छा लिखा है आपने

एक मेरी तरफ से...
कहना तो बहुत कुछ चाहते थे उनसे..
पर इस जुबान ने साथ ना दिया
कभी वक्त की ख़ामोशी में खामोश रह गए
कभी उनकी ख़ामोशी ने कुछ कहने ना दिया..]
:-)

मेरा मन पंछी सा said...

बहुत खूब|||
बहुत ही सुन्दर
:-)

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

किसी कोने मे दबी हुई
अब भी अनकही बातें हैं।

बेहतरीन रचना,,,,,

ZEAL said...

awesome ...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सुंदर ...

Anju (Anu) Chaudhary said...

बाते हैं ...बातो का क्या हैं ...

Anonymous said...

sundar panktiyan

विभा रानी श्रीवास्तव said...

किसी कोने मे दबी हुई
अब भी अनकही बातें हैं।
किसी अपने से कह डालिए
अगर दुःख है तो आधा और
सुख है तो दूना होना निश्चित है .... !!

निवेदिता श्रीवास्तव said...

बहुत ही अच्छा .......

shalini rastogi said...

बहुत खूब यशवंत जी!