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09 July 2012

शब्दों की मेड़

यहीं कहीं तो थी
शब्दों की वह मेड़
जिससे घेरा था
तरल मन को
बह जाने से रोकने को

वह मेड़ मजबूत थी
ठोस और अटल थी
विश्वास ,उत्साह  और
स्वाभिमान से लिपी पुती थी

शायद आत्ममुग्ध भी थी

तरल मन के भीतर की
अस्थिर लहरों की
धीमी धीमी चोटों से
आहत
शब्दों की 
वह मेड़
बिखर कर,टूट कर 
अब खो चुकी है कहीं
हमेशा के लिये

और मैं जुटा हूँ
पहले से मजबूत
एक और
नयी मेड़ बनाने में । 

©यशवन्त माथुर©

27 comments:

ANULATA RAJ NAIR said...

बहुत सुन्दर यशवंत...

सस्नेह

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

उम्दा अभिव्यक्ति,,,,

RECENT POST...: दोहे,,,,

अनुपमा पाठक said...

शब्दों की मेड़ मज़बूत से मज़बूत बने और भावों की वो सघनता सृजित हो जो हर बार मेड़ को बहा ले जाए, नयी मेड़ के सृजन का मार्ग प्रशस्त करती हुई...!
सुन्दर रचना!

संध्या शर्मा said...

वह मेड़ मजबूत थी
ठोस और अटल थी
विश्वास ,उत्साह और
स्वाभिमान से लिपी पुती थी
फिर बिखर नहीं सकती वक़्त की धूल जम गई होगी, ध्यान से देखें तो मेड़ वहीं कहीं होगी.... शुभकामनायें

सदा said...

वाह ... बहुत ही बढिया।

Dr.NISHA MAHARANA said...

और मैं जुटा हूँ
पहले से मजबूत
एक और
नयी मेड़ बनाने में । .बहुत ही आशावादी विचार एवम अभिव्यक्ति ..

kanu..... said...

wah:) bahut sundar yashwant ji

Anonymous said...

बहुत ही सुन्दर लगी पोस्ट।

Sawai Singh Rajpurohit said...

बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति. सुन्दर रचना. :-).
आज का आगरा

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून said...

सुंदर सकारात्‍मक रचना

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

क्या बात है
बहुत सुंदर

Anjani Kumar said...

एक मेड़ टूटना अन्त नही है....पुनर्निर्माण का सुन्दर सन्देश

sushma verma said...

शब्दों की अनवरत गहन अभिवयक्ति......

मेरा मन पंछी सा said...

सकारात्मक सोच व्यक्त करती रचना...
इस बार आपकी यह मेड़
बहुत मजबूत बने..कभी न टूटे ...
शुभकामनाये :-)

Sanju said...

Very nice post.....
Aabhar!
Mere blog pr padhare.

डॉ. मोनिका शर्मा said...

विश्वास ,उत्साह और
स्वाभिमान से लिपी पुती मेढ़ तो मजबूती लिए ही होगी.... बहुत सुंदर लिखा है...

Amrita Tanmay said...

उत्कृष्ट अभिव्यक्ति.

विभा रानी श्रीवास्तव said...

और मैं जुटा हूँ
पहले से मजबूत
एक और
नयी मेड़ बनाने में ।

आपकी हिम्मत , सकारात्मक सोच ,
आशावादी विचार की जीतनी प्रशंसा की जाए कम होगी .... :)

शुभकामनाएं .... !!

RITU BANSAL said...

बहुत सुन्दर रचना !
सादर
कलमदान

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

शब्दों की मेड़ ... सुंदर बिम्ब ले कर रची रचना

vandan gupta said...

बेह्द उम्दा रचना सुन्दर भावो को सहेजे

Saras said...

जीवन के खट्टे मीठे अनुभव..इस मेढ़ को अक्सर लहो लुहान कर देते हैं ......लेकिन अहसासों को बांधना भी ज़रूरी होता है ...बस पुनर्निर्माण का यह क्रम यूहीं सतत चलता रहता है ...बहुत सुन्दर रचना

Anonymous said...

और मैं जुटा हूँ
पहले से मजबूत
एक और
नयी मेड़ बनाने में ।
आशा की नई किरण की तरह,सुन्दर भाव,सुन्दर रचना...

Anita said...

वाह ! बहुत हिम्मत भरा भाव !

Anju (Anu) Chaudhary said...

वाह बहुत खूब ....सादर

Shashiprakash Saini said...

kya baat hai janab bahut khub

Madan Mohan Saxena said...

और मैं जुटा हूँ
पहले से मजबूत
एक और
नयी मेड़ बनाने में ।
वाह बहुत खूबसूरत अहसास हर लफ्ज़ में आपने भावों की बहुत गहरी अभिव्यक्ति देने का प्रयास किया है... बधाई आपको... सादर वन्दे
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