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02 October 2012

झूठ की मधुशाला में ......(गांधी जयंती विशेष)


















झूठ की मधुशाला में
जहां सच के जाम छलकते हैं
एक मेज पर प्रजा और राजा
वहाँ सबके सब बहकते हैं

सोच रहा हूँ मैं भी आज
एक बार वहाँ हो कर आऊँ 
झूठ कपट चढ़ा बांह पर
सच की छांह मे सो कर आऊँ

'बार' के सामने खड़ी कार में
बापू तुम्हारा चित्र देख कर
अरब-खरब सब खप जाते हैं
पेटी खोखा चोखा बन कर

सोच रहा हूँ वहाँ से लौट कर
उस फुटपाथ  पर टहल कर आऊँ -

जहां तुम्हारे 'वैष्णव जन'
अधनंगे हाथ फैलाते हैं
घिसट -घिसट रामधुन को गाते
दाना -पानी पाते हैं

झूठ की मधुशाला मे जो
सच के जाम टकराते हैं
आज देखना राजघाट पर
वे ही सर झुकाते हैं !


©यशवन्त माथुर©

19 comments:

Madhuresh said...

Bapu ke janmdin par sundar rachna.. aur haan background music blog ki bahut achhi hai.. :)
Madhuresh

DR. ANWER JAMAL said...

Nice post.
See
http://mushayera.blogspot.in/2012/10/anjum-rahbermp4.html

ANULATA RAJ NAIR said...

वाह ....
बहुत सुन्दर रचना यशवंत....
बहुत सार्थक सोच...
सस्नेह
अनु

Unknown said...

झूठ की मधुशाला मे जो
सच के जाम टकराते हैं
आज देखना राजघाट पर
वे ही सर झुकाते हैं !

सत्य को उजागर करती

amit kumar srivastava said...

विद्व जन तो तेने कहिये जेब में बापू रक्खें जो .....|

विभा रानी श्रीवास्तव said...

झूठ की मधुशाला मे जो
सच के जाम टकराते हैं
आज देखना राजघाट पर
वे ही सर झुकाते हैं !
कड़वी हकीक़त बड़ी विनम्रता से बयाँ हो गई !
शुभकामनायें !

Maheshwari kaneri said...

सार्थक सोच के साथ बहुत सुन्दर रचना..यशवंत..शुभकामनाएं

Unknown said...

खूबसूरत बेहद सटीक रचना बधाई यशवंत

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

सत्य को उजागर करती बापू के जन्म दिन पर सुंदर श्रद्धांजली,,,,

RECECNT POST: हम देख न सके,,,

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

झूठ की मधुशाला मे जो
सच के जाम टकराते हैं
आज देखना राजघाट पर
वे ही सर झुकाते हैं !

बहुत खूब ... व्यंगात्मक रचना ।

Kavita Rawat said...

झूठ की मधुशाला मे जो
सच के जाम टकराते हैं
आज देखना राजघाट पर
वे ही सर झुकाते हैं !
,..बोलबाला उन्हीं का जो है ...
बहुत बढ़िया सामयिक चिंतनशील प्रस्तुति

Anita Lalit (अनिता ललित ) said...

सुंदर अभिव्यक्ति... यशवंत !
~God Bless!!!

डॉ. मोनिका शर्मा said...

जहां तुम्हारे 'वैष्णव जन'
अधनंगे हाथ फैलाते हैं
घिसट -घिसट रामधुन को गाते
दाना -पानी पाते हैं

आज का कटु सत्य जो दुखद है हम सबके लिए

Chaitanyaa Sharma said...

बापू को नमन ....

Chaitanyaa Sharma said...

बापू को नमन ...

Coral said...

झूठ की मधुशाला मे जो
सच के जाम टकराते हैं
आज देखना राजघाट पर
वे ही सर झुकाते हैं !

सटीक!

Indira Mukhopadhyay said...

झूठ की मधुशाला मे जो
सच के जाम टकराते हैं
आज देखना राजघाट पर
वे ही सर झुकाते हैं !
wah, bahut khub likha hai Yashwantji.

Prakash Jain said...

satik, vyang mehsoos karane wala hai

संध्या शर्मा said...

झूठ की मधुशाला मे जो
सच के जाम टकराते हैं
आज देखना राजघाट पर
वे ही सर झुकाते हैं !
आज की सच्चाई यही है... सार्थक रचना

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