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16 October 2012

उसे महफूज रखना

सुबह से सुन रहा हूँ
फिल्मी पैरोडी पर
गूँजते भजनों का शोर
कभी तेज़
कभी धीमा संगीत
जिसके पार्श्व में
दबते से ,सिकुडते से बोल
न जाने कौन से
खोल में छुपे हुए हैं
हर ओर
बह रहा है 
सिर्फ संगीत ही संगीत
जिसके साथ
बहता जा रहा हूँ
मैं भी
गुनगुनाता जा रहा हूँ
फिल्मी गाना
अखबार मे छपी
मलाला की तस्वीर की
कल्पना करते हुए 
दुआ करते हुए
देवी माँ
उसे महफूज रखना
धरती की गोद में।

©यशवन्त माथुर©

21 comments:

Madan Mohan Saxena said...

बहुत अद्भुत अहसास...सुन्दर प्रस्तुति .

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

आजकल फ़िल्मी पैरोडी भजनों का चलन बढ़ गया है,,,और सुनने में अच्छे
भी लगते है,लेकिन पुराने भजनों जैसी बात आजकल नही है,,,

यशवंत जी,मै आपके हर पोस्ट पर आता हूँ किन्तु आप मेरे पोस्ट पर नही आते,,,आइये स्वागत है,,,
RECENT POST ...: यादों की ओढ़नी
RECENT POST: माँ,,,

vandan gupta said...

सच बयाँ कर दिया

Unknown said...

चर्चा मंच सजा रहा, मैं तो पहली बार |
पोस्ट आपकी ले कर के, "दीप" करे आभार ||
आपकी उम्दा पोस्ट बुधवार (17-10-12) को चर्चा मंच पर | सादर आमंत्रण |
सूचनार्थ |

shalini rastogi said...

बिल्कुल सही लिखा है यशवंत जी ... फिल्मी धुनों के पीछे श्रद्धा के स्वर एसुनाई ही नहीं देते ...

Maheshwari kaneri said...

फ़िल्मी पैरोडी पर आधारित भजन मे श्रद्धा भाव नही आपाता..लगता है कि हम कोई फिल्मी गीत सुम्रहे है..सुन्दर प्रस्तुति..

sangita said...

भक्त कि भक्ति तो मलाला जैसी होती है जिसे मां भी महफूज रखेगी ,यशवंतजी आपका मेरे ब्लॉग पर स्वागत है |आभार सार्थक काव्य पर |

विभा रानी श्रीवास्तव said...

देवी माँ
उसे(Sabako) महफूज रखना
धरती की गोद में।
Shubhkamnayen !!

ANULATA RAJ NAIR said...

बहुत बढ़िया..सच बात...

सस्नेह
अनु

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

फ़िल्मी पैरोडी भजनों के बारे में क्या कहूँ ... ऐसा लगता है खाने के प्लेट पर कोई जूता रख दिया हो ... जूते कितने भी सुन्दर हो पर खाया नहीं जाता ...

खैर आपकी कविता अच्छी लगी ... जानवरों के समाज में लढती हुई एक इंसान के बारे में आपने सोचा यह अच्छा लगा ...

Unknown said...

ITS TRUE

Anita Lalit (अनिता ललित ) said...

सही कहा यशवंत !
फिल्मी गीतों पर भजनों की Parody.... सच में Horrible! बहुत गुस्सा आता है...मगर क्या करें ? अपनी जनता में कुछ ऐसे लोग भी हैं..जिन्हें इस बात की समझ ही नहीं... :(
~God Bless !!!

डॉ. मोनिका शर्मा said...

मलाला के हौसले को नमन ..... देवी माँ महफूज़ रखे

Bharat Bhushan said...

मलाला बच्ची है और उसके मासूमियत को तालिबान नहीं देख पाए. काहे के तालिबान हैं?

Anonymous said...

सत्य !!!

babanpandey said...

बधाई , नवरात्र मंगलमय हो .
प्रश्न विचारणीय है ..

निर्दोष 'कान्तेय' said...

भाई प्रदीप कुमार साहनी के चर्चा मंच के माध्यम से आपका लिंक मिला, बहुत प्रसन्नता हुई, उनके माध्यम से कुछ अच्छा पढ़ने को मिला..... आपकी बेहतरीन प्रस्तुति।

sushma verma said...

देवी माँ
उसे(Sabako) महफूज रखना
धरती की गोद में।...प्रभावशाली रचना.....

मेरा मन पंछी सा said...

सही बात है,,
फ़िल्मी गीतों पर भगवान के गाने अच्छे नहीं लगते...
नवरात्री की शुभकामनाएँ...
:-)

Onkar said...

सुन्दर रचना

मदन शर्मा said...

बहुत ही अच्छा लिखा आपने .

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