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05 November 2012

क्षणिका...

इन ठंडी रातों में
मन के वीरान
मैदान पर  
जहां तहां उग आयी
ख्यालों की दूब पर
चमकती बूंदों को देख कर
ऐसा लगता है जैसे
अंधेरा भी रोता है
ओस के आँसू !

©यशवन्त माथुर©

21 comments:

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

बहुत बढ़िया क्षणिका,,,,

RECENT POST : समय की पुकार है,

ANULATA RAJ NAIR said...

बहुत सुन्दर....
सस्नेह
अनु

Anonymous said...

touchy

मेरा मन पंछी सा said...

वीराने मन में जहाँ तहां ख्याल आ ही जाते है..
सुन्दर रचना...
:-)

विभा रानी श्रीवास्तव said...


:)
<3
8)

Madhuresh said...

आह, इतने कम शब्दों में इतनी गहरी बात कह दी आपने ..
सादर
मधुरेश

Maheshwari kaneri said...

बहुत सुन्दर...

Anita Lalit (अनिता ललित ) said...

अंधेरा मुस्काता है...तो चाँद निखरता है...
और जब रोता है... तो ओस टपकती है...
सुंदर रचना !
~God Bless !

Unknown said...

बहुत बढ़िया क्षणिका

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सुंदर भावभिव्यक्ति

डॉ. मोनिका शर्मा said...

बहुत सुंदर क्षणिका

sushma verma said...

bhaut hi badiya....

यशवन्त माथुर (Yashwant R.B. Mathur) said...

ई मेल से प्राप्त टिप्पणी-
================
Prabodh Govil
Bahut khoob kah raha hai mann aapka.

sajjan jee said...

इन ठंडी रातों में
मन के वीरान
मैदान पर
जहां तहां उग आयी
ख्यालों की दूब पर
चमकती बूंदों को देख कर
ऐसा लगता है जैसे
अंधेरा भी रोता है
ओस के आँसू !

sajjan jee
awesome.

sajjan jee said...

इन ठंडी रातों में
मन के वीरान
मैदान पर
जहां तहां उग आयी
ख्यालों की दूब पर
चमकती बूंदों को देख कर
ऐसा लगता है जैसे
अंधेरा भी रोता है
ओस के आँसू !

sundar rachana
sajjan jee

निहार रंजन said...

चंद शब्दों में सूक्ष्म अनुभवों की बड़ी बात कह दी आपने. सुन्दर रचना की बधाई.

यशवन्त माथुर (Yashwant R.B. Mathur) said...

ई मेल पर प्राप्त ---

शालिनी रस्तोगी


क्या बात है यश्वत जी, अद्भुत कल्पना ....

यशवन्त माथुर (Yashwant R.B. Mathur) said...

ई मेल पर प्राप्त

rajeev ---

बहुत ही सरस रचना, बेहद उम्दा

यशवन्त माथुर (Yashwant R.B. Mathur) said...

बहुत ही सरस रचना, बेहद उम्दा

यशवन्त माथुर (Yashwant R.B. Mathur) said...

क्या बात है यश्वत जी, अद्भुत कल्पना ....

यशवन्त माथुर (Yashwant R.B. Mathur) said...

क्या बात है यश्वत जी, अद्भुत कल्पना ....