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21 January 2013

कलम.....

न कुछ सोच कर
न कुछ समझ कर
कुलबुलाती कलम तो बस
यूं ही चलती है
कागज की राहों पर

कागज की राहों पर
जिनका आदि तो निश्चित है
पर अनिश्चित अन्त तक
पहुँचते पहुँचते
क्या क्या रच देगी कलम
कुछ स्याह कुछ सफ़ेद
शायद उसे भी पता नहीं

कलम वरदान है
अभिशाप भी है
अनोखा पुण्य है
और पाप भी है 

कलम मंत्र है
अजान,अरदास और प्रार्थना है
कलम जीवन है
और मौत की याचना है

न कुछ सोच कर 
न कुछ समझ कर 
शब्द सीमाओं के परे
कागज़ की मायावी दुनिया में
पंछी की तरह उड़ती है कलम
बस कुछ उँगलियों में जकड़ कर !

©यशवन्त माथुर©

11 comments:

डॉ. मोनिका शर्मा said...

कलम वरदान है
अभिशाप भी है
अनोखा पुण्य है
और पाप भी है

यकीनन .....

निहार रंजन said...

बस इसकी निरंतरता बरकरार रखिये यशवंत भाई. सुन्दर भाव.

विभा रानी श्रीवास्तव said...

शब्द सीमाओं के परे
कागज़ की मायावी दुनिया में
पंछी की तरह उड़ती है कलम

और रचती है रचना आपकी लाजबाब !!

शुभकामनायें :))

Shalini kaushik said...

सुन्दर भावनात्मक अभिव्यक्ति कलम आज भी उन्हीं की जय बोलेगी ...... आप भी जाने कई ब्लोगर्स भी फंस सकते हैं मानहानि में .......

Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर रचना...

आर्यावर्त डेस्क said...

प्रभावशाली ,
जारी रहें।

शुभकामना !!!

आर्यावर्त (समृद्ध भारत की आवाज़)
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संध्या शर्मा said...

कलम यूँ ही चलती रहे... इतिहास, वर्तमान, भविष्य रचने का सामर्थ्य रखती है यह कलम...लाजबाब रचना...शुभकामनाये

Anita said...

कलम मंत्र है
अजान,अरदास और प्रार्थना है
कलम जीवन है
और मौत की याचना है

सही कहा है..कलम के बल पर ही जीवित हैं सूर, कबीर तुलसी...

Rajesh Kumari said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार 22/1/13 को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका वहां स्वागत है

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

केंद्र बिंदु, मष्तिक है मेरा
नये विषय का,लगता फेरा
लिखता जो,मेरा मन करता
मेरी कलम से,कायर डरता,,,

recent post : बस्तर-बाला,,,

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत बढ़िया .... वैसे अभी की बोर्ड वाली कविता पढ़ कर आ रही हूँ ...