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07 March 2013

यह सब चलता रहेगा.....

दामिनी...
सोनी सोरी ...
और भी हैं कई
जिनके नाम
मालूम हैं हमें
और कुछ गुमनाम होकर
वक़्त और भाग्य की चोट
सह रही हैं
या गिन रही हैं
घड़ी की टिक टिक
हर पल

कुछ सांसें
उखड़ चुकी हैं
कुछ सांसें
मांगती हैं
हर रोज़ हिसाब
घुट घुट कर
जीने का

यह सिलसिला
चलता रहेगा
भाषण गूँजते रहेंगे
लिखावटें
छपती रहेंगी
स्याह तस्वीरें
दिखती रहेंगी
जब तक
बदलेगी नहीं
सोच 
और दृष्टि
और जब तक
हमें
होगी नहीं पहचान
सफ़ेद मुखौटे मे
छुपे
काले चेहरों की !
©यशवन्त माथुर©

5 comments:

विभा रानी श्रीवास्तव said...

सोच
और दृष्टि
बदलेगी कब तक ........

Shalini kaushik said...

बहुत सुन्दर भावनात्मक प्रस्तुति आभार प्रथम पुरुस्कृत निबन्ध -प्रतियोगिता दर्पण /मई/२००६ यदि महिलाएं संसार पर शासन करतीं -अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस आज की मांग यही मोहपाश को छोड़ सही रास्ता दिखाएँ .

Rajendra kumar said...

बहुत ही मार्मिक प्रस्तुति,आभार.

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून said...

बदकिस्मती है कि ये सब वाकई चलता ही रहेगा

Rewa Tibrewal said...

haan ye tho hai .....par prashn wahi ka wahi ....kab tak ??