प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

वेब सर्च (Enter your keywords to search on web)

02 July 2013

सब चाहते हैं......

सब चाहते हैं सबकी नाव
आकर लगे किनारे पर
सब चाहते हैं अबकी बार
हों खड़े बिना किसी सहारे पर

सब चाहते हैं पाते जाना
सागर की गहराइयों को
सब चाहते हैं छूते जाना
आसमान की ऊंचाइयों को

सब चाहते हैं चलते जाना
फिर भी थक कर बैठ जाते हैं
सब चाहते हैं कछुआ बनना
खरगोश बन कर सो जाते हैं

सब चाहते हैं पूरे सपने
सब चाहते हैं सब हों अपने
सब चाहते हैं सब कुछ पा कर
कुछ कभी न खो पाना

सब चाहते हैं ऐसे ही
जीवन धारा का चलता जाना
सब चाहते हैं पास आते ही
दूर किनारे से हट जाना 

सब चाहते हैं सबकी नाव
तैरती रहे जल धारा पर
सब चाहते हैं कभी न डूबे
किसी पत्थर से टकरा कर।
   
~यशवन्त माथुर©

20 comments:

रविकर said...

बहुत बढ़िया है भाई यशवंत-
जुग जुग जियो-

चाहत राहत दे नहीं, करना पड़े प्रयास |
बिन प्रयास के क्या कभी, पूरे चाहत-ख़ास ||

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

लेकिन होता वही है जो राम रचि राखा

विभा रानी श्रीवास्तव said...

सबका मन चाहा कहाँ होता है
आपका मन चाहा पूरा हो
हार्दिक शुभकामनायें

Ranjana verma said...

सब चाहते है ऐसे ही जीवन धारा का चलती जाना ......बहुत सुंदर एहसास और सुंदर अभिव्यक्ति !!

Maheshwari kaneri said...

्सब तो यही चाहते हैं ..काश ऐसा ही हो..

संजय भास्‍कर said...

पढ़ कर मुंह से वाह वाह ही निकलता हैं
सच में बेहद सार्थक रचना है।
बहुत अच्छी लगी

sushma verma said...

sab ki sabhi chahte puri kahan hoti hai....

Dr. Shorya said...

बहुत सुंदर रचना, शुभकामनाये

Vandana Ramasingh said...

वाकई सब यही चाहते हैं ......सरल प्रवाह

Bharat Bhushan said...

बहुत बढ़िया. हमारा अचेतन मन बना ही ऐसा है. खरीदारियाँ करता है और आशाएँ पालता जाता है.

prritiy----sneh said...

jeevan ka saransh....bahut achha

shubhkamnayen

Unknown said...

जीवन में उभरती कामनाओं का खुबसूरत लेखा जोखा

Anita said...

सब चाहते हैं सब शुभ हो..पर ऐसा होता कहाँ है..होगा तब जब शुभता से ही प्रीत हो जाये...

दिगम्बर नासवा said...

चाहत के साथ पराया बी ऐसा हो तो कितना अच्छा हो जाए ...

Kailash Sharma said...

जो चाहते हैं वह कब हो पाता है...बहुत सुन्दर और सटीक अभिव्यक्ति...

निहार रंजन said...

ख्वाहिशों का समग्र संकलन. बहुत बढ़िया.

डॉ. मोनिका शर्मा said...

चाहत तो सभी यही होती है ..... सुंदर पंक्तियाँ

मेरा मन पंछी सा said...

सब कुछ मिल जाये जीवन में यह तो सभी की चाहत है..
बहुत ही बेहतरीन रचना...
:-)

Madhuresh said...

सुन्दर पंक्तियाँ यशवंत भाई। वाकई चाहत तो सभी की ऐसी ही है, बस जो प्रेरित हो आगे बढे, उसकी जय है.
सादर
मधुरेश

अनुपमा पाठक said...

चाहतें तो अंतहीन हैं ही...
पूरी हों तो भी, न हो पाए तो भी!