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07 July 2013

कविता और कवि ...

'जहां न पहुंचे रवि
वहाँ पहुंचे कवि '
जो कह न सके कभी
वही कह देता अभी

कविता और कवि ......।

न ज्ञान व्याकरण का
न भाषा का, शुद्धता का
हर कोई है 'बच्चन','पंत'
महा भक्त 'निराला' का

न कॉमा, विराम कभी
न छंद,अलंकार कभी
उसके कुतर्क ही सही
'दिनकर' वही, 'कबीर','सूर' वही

हर गली दिखता वही
अभी यहाँ,फिर वहाँ कभी
कुकुरमुत्ते की सी छवि
डूबती कविता,उतराता कवि

खुद के लिखे को कभी
किताब बना छपवाता कवि
कीमत डेढ़ सौ,मुफ्त बाँट पाँच सौ
मुस्कुराता- इतराता कवि

कविता और कवि.....। 


 ~यशवन्त माथुर©

20 comments:

निहार रंजन said...

सच्चाई सौ प्रतिशत.

Kailash Sharma said...

बहुत सटीक प्रस्तुति...

विभा रानी श्रीवास्तव said...

खूबसूरत सच्चाई
God Bless U

Manav Mehta 'मन' said...

बहुत बढ़िया

Onkar said...

आधुनिक कवियों पर सुन्दर व्यंग्य

s said...

बेहतरीन प्रस्तुति … बधाई

Ranjana verma said...

बिल्कुल सही कहा.... अच्छी रचना ...

Dr. Shorya said...

बहुत सुंदर ,
बिलकुल सही कहा , साहित्य को पढ़े बिना, कभी भी अच्छा नही लिखा जा सकता ,आभार


यहाँ भी पधारे
http://shoryamalik.blogspot.in/2013/07/blog-post_5.html

Shikha Kaushik said...

सार्थक रचना .आभार

sushma verma said...

khubsurat sach...

Shalini kaushik said...

.बहुत सुन्दर भावनात्मक अभिव्यक्ति . आभार क्या ये जनता भोली कही जाएगी ? #
आप भी जानें संपत्ति का अधिकार -5.नारी ब्लोगर्स के लिए एक नयी शुरुआत आप भी जुड़ें WOMAN ABOUT MAN हर दौर पर उम्र में कैसर हैं मर्द सारे ,

yashoda Agrawal said...

आपने लिखा....
हमने पढ़ा....
और लोग भी पढ़ें;
इसलिए बुधवार 10/07/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
पर लिंक की जाएगी.
आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
लिंक में आपका स्वागत है .
धन्यवाद!

Anonymous said...

ज़बरदस्त कटाक्ष साथ ही साथ कटु यथार्थ !

Maheshwari kaneri said...

बिल्कुल ठीक कहा यशवंत..कवि हमेशा बेचारा ही होता है..

सु-मन (Suman Kapoor) said...

बहुत बढ़िया

Unknown said...

सच्चाई को बतलाती रचना बहुत सुन्दर

प्रतिभा सक्सेना said...

बेचारा !

Anonymous said...

सत्य से रूबरू ....

सु-मन (Suman Kapoor) said...

बहुत ही बढ़िया

***Punam*** said...

सही कहा....