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15 August 2013

स्वतन्त्रता दिवस पर


सच बोलो तो जेल मिलेगी
झूठ बोलो तो आज़ादी
ईमानदारी की ऐसी तैसी
बेईमान काटते हैं चाँदी

कटोरा हाथ मे लिये फिरता बचपन
लोट लगाता सड़कों पर  
जब भी देखता चमक दमक
तब रोता अपनी किस्मत पर

आती जाती हर नारी को
घूरती नज़रें खा जाने को
दुर्योधन सब बने घूमते
नहीं कृष्ण लाज बचाने को 

फुटपाथों पर जिंदगी मिलती
कूड़े के ढेर पर आज़ादी
जन गण मन की इसी धुन पर
कहीं विलासिता कहीं बर्बादी

फिर भी आज है जश्न
अरे देखो नयी गुलामी का
जो पाया सब खो दिया
मोल न समझा कुर्बानी का।

~यशवन्त माथुर©

18 comments:

विभा रानी श्रीवास्तव said...

नवीन शुभप्रभात बेटे
स्वतन्त्रता दिवस की
हार्दिक शुभकामनायें

Ranjana verma said...

सही कहा मोल न समझा कुर्बानी का..... स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें .....

yashoda Agrawal said...

अत्यन्त हर्ष के साथ सूचित कर रही हूँ कि
आपकी इस बेहतरीन रचना की चर्चा शुक्रवार 16-08-2013 के .....बेईमान काटते हैं चाँदी:चर्चा मंच 1338 .... पर भी होगी!
सादर...!

डॉ. मोनिका शर्मा said...

हुआ तो यही है .... जो दुखद है ...

Maheshwari kaneri said...

बहुत बढिया..स्वतन्त्रता दिवस की
हार्दिक शुभकामनायें

sushma verma said...

खुबसूरत अभिवयक्ति...... आपको भी स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक मंगलकामनाएँ....

संजय भास्‍कर said...

बहुत बढिया....स्वतन्त्रता दिवस की
हार्दिक शुभकामनायें !!

दिगम्बर नासवा said...

फुटपाथों पर जिंदगी मिलती
कूड़े के ढेर पर आज़ादी ..

सच तो यही है ... देश के हालात इतने सालों बाद भी ऐसे हैं ...
स्वतंत्रता दिवस की बधाई और शुभकामनायें ...

अनुपमा पाठक said...

स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!

Onkar said...

सार्थक रचना

Aparna Bose said...

स्वतन्त्रता दिवस की
हार्दिक शुभकामनायें

HARSHVARDHAN said...

आज की बुलेटिन स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई ....ब्लॉग बुलेटिन में आपकी पोस्ट (रचना) को भी शामिल किया गया। सादर .... आभार।।

मेरा मन पंछी सा said...

सार्थक रचना...
स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ...
:-)

अरुण चन्द्र रॉय said...

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक मंगलकामनाएँ

अरुण चन्द्र रॉय said...

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक मंगलकामनाएँ

हरीश जयपाल माली said...

ये कैसी आजादी ...? हिंदुस्तान का चरित्र चित्रण लाजवाब बन पड़ा है।

Unknown said...

फुटपाथों पर जिंदगी मिलती
कूड़े के ढेर पर आज़ादी
जन गण मन की इसी धुन पर
कहीं विलासिता कहीं बर्बादी

यथार्थ को बयान करती स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक मंगलकामना

संध्या शर्मा said...

फिर भी आज है जश्न
अरे देखो नयी गुलामी का
जो पाया सब खो दिया
मोल न समझा कुर्बानी का।
बिलकुल सही …. सटीक