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24 September 2013

बातें नहीं करता

नहीं 
मैं अंधेरे में 
काले आसमान से 
बातें नहीं करता  

नहीं 
मैं रोशनी में 
चमकते चाँद तारों से 
बातें नहीं करता 

नहीं 
मैं आस पास बिखरे
रिश्ते नातों से 
बातें नहीं करता 

क्योंकि 
मैं बातें करता हूँ 
भाव शून्य दीवारों से 

क्योंकि 
मैं बातें करता हूँ 
बंद कमरों पर लटके तालों से

मेरी बेमतलब 
बातों को 
हर कोई  
समझ नहीं सकता 

मैं इसीलिए
खुद से भी 
खुद की 
बातें नहीं करता। 

~यशवन्त यश©

15 comments:

संध्या शर्मा said...

गहन भाव...

डॉ. मोनिका शर्मा said...

सच है ...यह द्वंद्व शायद सबके लिए है .....

Unknown said...

भावपूर्ण रचना |

parul said...

वाह !

विभा रानी श्रीवास्तव said...

इस लिए तो मेरे
मन को भाते हो बेटे जी
हार्दिक शुभकामनायें

निहार रंजन said...

बहुत गहरी रचना.

Manjusha negi said...

गहरी अभिव्यक्ति..

Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर और गहन प्रस्तुति...

Noopur said...

Sahi kaha....
Koi samajh nahi sakta isliye khud se b khud ki baat nahi karta.....

Anonymous said...

बहुत सुन्दर ....

Counselor Sharma said...

बेहद सुंदर अभिव्यक्ति

संजय भास्‍कर said...

behtreen rachna

मेरा मन पंछी सा said...

गहरे भाव...
सुन्दर..
:-)

सु-मन (Suman Kapoor) said...

बधाई ब्लॉगर मित्र ..सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगों की सूची में आपका ब्लॉग भी शामिल है |
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sheetal said...

bahut sundar kavita ke jariye aapne apni baat kahi hain