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05 September 2013

कोई था जो अब भी है

जब घबरा जाता था
कठिन शब्दों की इमला से
आँखों से बहने लगते थे आँसू
तब कोई था
जो हौसला बढ़ाता था
लिखना सिखाता था

जब लिख कर दिखाता था
किसी पन्ने पर 
कल्पना से बातें करती
कोई कविता
तब कोई था
जो सहेजना सिखाता था

जब पढ़ता था
फर्राटेदार संस्कृत
क्लास रूम रीडिंग के समय
तब कोई था
जो सबसे तालियाँ बजवाता था

जब ज़रूरत थी
कॉमर्स की
महंगी किताबों की
तब कोई था
जो निश्चिंत रहने को कहता था

जब दिक्कत आती थी
अङ्ग्रेज़ी बोलने में
नौकरी की जगह पर
तब कोई था
जो झिझक मिटाता था

वो कोई था
वो अब भी है
मेरे दिल के भीतर
बीते दिनों की यादों के साथ 
इस सफर में
न कभी भूला हूँ
न कभी भूलूँगा
अपने शिक्षकों को।

शिक्षक दिवस पर सादर समर्पित --
चतुर्वेदी मैडम (श्री एम एम शैरी स्कूल कमला नगर आगरा-वर्ष 1988-2000)
श्रीवास्तव मैडम (श्री एम एम शैरी स्कूल कमला नगर आगरा-वर्ष 1988-2000)
जौहरी मैडम (श्री एम एम शैरी स्कूल कमला नगर आगरा-वर्ष 1988-2000)
सीमा राणा मैडम  (श्री राधा बल्लभ इंटर कॉलेज दयाल बाग आगरा-वर्ष 2000-2002)
डॉ रंजन पोरवाल सर (वाणिज्य संकाय-राजा बलवंत सिंह महाविद्यालय आगरा-वर्ष 2002-2005)
एवं सुब्रतो दत्ता सर को (जिन्होंने मेरी नौकरी के दौरान समय समय पर प्रेरित किया-वर्ष 2006)

~यशवन्त यश©

18 comments:

विभा रानी श्रीवास्तव said...

आपके सभी शिक्षक को नमन
बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति के लिए बधाई
हार्दिक शुभकामनायें

yashoda Agrawal said...

अत्यन्त हर्ष के साथ सूचित कर रही हूँ कि
आपकी इस बेहतरीन रचना की चर्चा शुक्रवार 06-09-2013 के .....सुबह सुबह तुम जागती हो: चर्चा मंच 1361 ....शुक्रवारीय अंक.... पर भी होगी!
सादर...!

Unknown said...

बहुत सुंदर ...आपके गुरुओं को मेरा प्रणाम

Maheshwari kaneri said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति .. सभी शिक्षकों को नमन ..

सु-मन (Suman Kapoor) said...

शिक्षक दिवस की शुभकामनायें

Darshan jangra said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - शुक्रवार -6/09/2013 को
धर्म गुरुओं का अधर्म की ओर कदम ..... - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः13 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra





Saras said...

सच्चे और अच्छे गुरु ...बहुत कम मिलते हैं...और जो मिलते हैं ...उम्र भर की सौगातें दे जाते हैं

Darshan jangra said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - शुक्रवार -6/09/2013 को
धर्म गुरुओं का अधर्म की ओर कदम ..... - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः13 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra





निहार रंजन said...

बहुत सुंदर. गुरु ही सच्चे दीपक होते हैं.

Bharat Bhushan said...

बहुत बारीक़ अनुभव को आपने लिख दिया है. शिक्षक हमारे भीतर रह कर ऐसे ही कार्य करता रहता है.

वाणी गीत said...

सभी गुरुओं को शुभकामनायें !

Anita said...

वाह ! आपकी कविता पढ़कर तो मन भीग गया..शिक्षक दिवस पर ढेरों शुभकामनायें तथा आपके शिक्षकों को भी नमन !

Ranjana verma said...

बहुत सुंदर भाव शिक्षक दिवस की बधाई !!

sushma verma said...

खुबसूरत अभिवयक्ति......

अरुण चन्द्र रॉय said...

शिक्षक दिवस की शुभकामनायें

Reena Pant said...

बहुत सुंदर प्रस्तुति ,सभी गुरुजनों को शत शत अभिनन्दन

Prakash Jain said...

Waah, bahut sundar Yashwant ji:-)

राजीव कुमार झा said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति.