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16 October 2013

तितलियाँ....

'पंक्तियों' की श्रेणी में यह मेरे जीवन और इस ब्लॉग की 500 वीं पोस्ट है। जबकि कुल प्रकाशित पोस्ट्स की संख्या 559 हो चुकी है। आप सभी के आशीर्वाद और निरंतर मिल रहे स्नेह के लिए हार्दिक आभारी हूँ।

चित्र: विभा आंटी की फेसबुक से
रंगीन फूलों से महकते
उस बगीचे में
रोज़ दिन भर
उड़ान भरती हैं
रंगीन तितलियाँ
न जाने कौन सी
बात करती हैं
अपनी ज़ुबान में
सुन कर जिसे मुस्कुराती हैं
फूलों की पंखुड़ियाँ

मेड़ पर लगी ईंटों से
कभी पत्थरों से
अनजान हवा में बहती
चलती हैं तितलियाँ
मैंने पकड़ना तो बहुत चाहा
पर खुद को ही रोक लिया
कैद में रह कर उदास
हो जाती हैं तितलियाँ

चित्र: विभा आंटी की फेसबुक से
खिले मौसम की
खिली खिली बहारों में
या बारिश की रिमझिम
बरसती फुहारों में
हँसते फूलों से प्यार
जताती हैं तितलियाँ
अपनी मस्ती में कुछ
कहती जाती हैं तितलियाँ। 

~यशवन्त यश©

16 comments:

parul said...

बचपन में जी भर के देखी थी... बड़े शहरों में दिखाई भी नहीं देती ये तितलियां..
हम बड़े क्या हो गये.. ग़ायब ही हो गईं ये तितलियां ।।

sushma verma said...

conratulations...aap yuh hi likhte rahe.....

Maheshwari kaneri said...

मन के सुन्दर भाव तितलियो के संग..खुबसूरत पंक्तियाँ..५००वी पोस्ट के लिए बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं

विभा रानी श्रीवास्तव said...

५०० वीं पोस्ट के लिए बहुत बहुत बधाई
और आने वाले ५०००००००००००००००००००० वीं पोस्ट के लिए
हार्दिक शुभकामनायें
गूगल का आभार समझ में आता है
हक को आभार का नाम देना खटक गया
उम्मीद है हटा देंगे
रचना बहुत सुन्दर है

यशवन्त माथुर (Yashwant R.B. Mathur) said...

ओके आंटी 'साभार' शब्द हटा देता हूँ लेकिन फोटो का क्रेडिट तो आपको मिलना चाहिए न :)

सादर

विभा रानी श्रीवास्तव said...

बेटे के एक मुस्कान के आगे क्रेडिट का क्या मोल

Bhavana Lalwani said...

aajkal titli shabd k anek arth aur upmaayein ho gai hain .. aur is seedhe saade praani ko toh ab sach mein public garden mein talaashna padta hai .. dikhe toh fotu kheench k logon ko dikhaate hain varna pollution ki maar titli laachaar ..

निहार रंजन said...

सुन्दर. आपकी पंक्तियाँ बहुत गहरी संवेदनाओं से उठ के आती हैं. ऐसे ही लिखते रहें. बधाई और शुभकामनायें.

यशवन्त माथुर (Yashwant R.B. Mathur) said...

यहाँ तितली का अर्थ तितली ही है मैम

prritiy----sneh said...

sunder rachna
badhai
shubhkamnayen

दिगम्बर नासवा said...

संवेदना ओर प्रेम की महक लिए आपकी ५००वी रचना की बधाई ...
ऐसे ही लिखते रहें ... बधाई ...

ऋता शेखर 'मधु' said...

५००वीं रचना की बधाई...यूँ ही सृजन जारी रहे...शुभकामनाएँ!!

अनुपमा पाठक said...

बहुत सुन्दर!

बधाई!

nayee dunia said...


बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की इस प्रविष्टि की चर्चा शनिवार 19/10/2013 को प्यार और वक्त...( हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल : 028 )
- पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर ....

Unknown said...

कहाँ से खोज कर लाते हैं यश जी इतने सुन्दर शब्द ...........कविता पढ़ कर निशब्द हूँ कुछ नहीं सूझ रहा क्या लिखूं सिर्फ इतना कह सकती हूँ अद्भुत बचपन में खीच ले गए आप

Unknown said...

कहा से खोज लाते हैं इतने प्यारे शब्द यश जी ...........कविता पद कर निशब्द हो गई हूँ सिर्फ इतना कह सकती हूँ अद्भुत