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29 October 2013

बैठा है एक दीये वाला

सड़क किनारे 
ठौर जमाए 
बैठा है एक दीये वाला 
 
भूख की आग में 
तपी मिट्टी से 
हर घर रोशन करने वाला 

उसके आगे ढेर सजे हैं 
तरह तरह के आकार ढले हैं 
वो है खुशियाँ देने वाला 

मोल भाव में वो ही फँसता 
वो ही महंगा वो ही सस्ता
फिर भी मुस्कान की चादर ओढ़े 

बैठा  है एक दीये वाला।

~यशवन्त यश©

10 comments:

parul said...

बहुत सुन्दर, मुझे भी बहुत अच्छे लगते हैं...ये दिये वाले.

nilesh mathur said...

बहुत सुंदर और सटीक...

Ranjana verma said...

बहुत खुबसूरत ...दियेवाला .....

निहार रंजन said...

ह्रदय छू लिया आपकी पंक्तियों ने.

अरुण चन्द्र रॉय said...

dil ko chhone wali kavita

प्रीतेश दुबे said...

बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ,
आज के परिदृश्य में देखे तो हर आम आदमी एक दिए वाले कि तरह ही है,

डॉ. मोनिका शर्मा said...

Bahut Bhavpoorn

Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर संवेदनशील अभिव्यक्ति...

a gal in city said...

बहुत खूब
पूरी दीवाली का दृश्य सामने आ गया

विभा रानी श्रीवास्तव said...

सार्थक अभिव्यक्ति
हार्दिक शुभकामनायें