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17 May 2014

कुछ लोग-1

ऊंची डिग्रीधारी
कुछ लोग
समझने लगते हैं
कभी कभी
खुद को
इस कदर काबिल
कि बंद हो जाता है
दिखना
उनको हर वो शख्स
जो परिधि में नहीं आता
उनके आसपास फैली
चकाचौंध की .......

वह लोग
सिमटे-सिकुड़े रहते हैं
अपनी सोच की
अनूठी
चादर के भीतर
जिसकी लंबाई चौड़ाई
फैली होती है
यूं तो
मीलों दूर तक
फिर भी सीमित रहते हैं
खुद के बनाए
उसी अंधेरे वर्ग
या वृत्त के चारों ओर
जिसकी लक्ष्मण रेखा लांघना
उनके लिए
किसी प्रतिकूलता से कम नहीं .....

ऐसे लोग
खुदा होते हैं
खुद की नज़रों में
और उनके चाटुकार
रोज़ रचते हैं
झाड़ की ऊंचाइयों पर
नये नये संविधान
जिसकी हर धारा
और उपधारा
कहीं दूर होती है
उनकी श्री की
वास्तविक
वर्तमान
और भावी
तस्वीर से ......

इसलिये
मैं कोशिश करता हूँ
दूर रहने की
ऊंची डिग्रीधारी
कुछ लोगों से 
क्योंकि 
मुझे पसंद है रहना 
शून्य की सतह पर। 

~यशवन्त यश©

3 comments:

सुशील said...

टिप्पणी देने में ऊपर की नीचे हो जा रही है :) सुंदर रचना । इस पर दिया कमेंट नीचे की पोस्ट पर दिख रहा है ।

Yashwant Yash said...

ई मेल पर प्राप्त--
----

जिसकी लंबाई चौड़ाई
फैली होती है
यूं तो
मीलों दूर तक
फिर भी सीमित रहते हैं
खुद के बनाए
उसी अंधेरे वर्ग
या वृत्त के चारों ओर

bahut achha likha hai, goodh baat.

aapne fir comment blogger ke roop mein dene se hata diya? vahi achha lagta hai...

shubhkamnayen

Wishing All The Best,
Warm Regards,
Prritiy

अनुराधा said...

बहुत सुंदर रचनाएँ, बहुत तरह के लोगों का मनोवैज्ञानिक विवेचन ।