प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

वेब सर्च (Enter your keywords to search on web)

25 June 2014

न अच्छे दिन हैं,न कडवे ही दिन हैं ये .....

https://www.facebook.com/ravishkumarndtvfans/posts/258233774381812
न अच्छे दिन हैं,न कडवे ही दिन हैं ये 
गरीब की पीठ पर,कोड़े से पड़े दिन हैं ये । 
कड़वे होते तो असर करते नीम की तरह 
मीठे होते तो हलक मे घुलते गुड़ की तरह। 
अंबानियों के महलों में रोशन होते दिन हैं ये 
फुटपथियों के झोपड़ों में सिसकते दिन हैं ये । 

~यशवन्त यश©

6 comments:

Anita said...

यथार्थवादी लेखन

सुशील कुमार जोशी said...

यथार्थ ।

Maheshwari kaneri said...

उम्मीद पर दुनिया कायम है..

डॉ. जेन्नी शबनम said...

फुटपाथ की झोपड़ियों के दिन कभी फिरते ही नहीं, चाहे पहले, चाहे अबकी बार...
बहुत उम्दा लिखा है, बधाई.

दिगम्बर नासवा said...

अभी तो समय बतानेवाला है क्या होता है ... दिन कहाँ हैं ...

Madhuresh said...

ग़रीबों के लिए कहाँ बदलती हैँ कहानियाँ! सच लिखा है आपने!
सादर
मधुरेश