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07 July 2014

अच्छा ही है

अच्छा ही है
मन का थम जाना
कभी कभी
शून्य हो जाना
शब्दों का
कहीं खो जाना
कल्पना का
और यहीं कहीं
किसी किनारे पर
रुक कर सुस्ताना
बहती धारा का ....
टकरा टकरा कर
कितने ही पत्थरों को
अस्तित्वहीन कर देने के बाद
कितने ही प्यासे हलक़ों मे उतर कर
जीवन देने के बाद
अच्छा ही है
एक करवट ले कर
सो जाना
खो जाना
भविष्य की यात्रा
और नए पड़ावों के
सुनहरे सपनों मे ।

~यशवन्त यश©

9 comments:

डॉ. मोनिका शर्मा said...

ऐसे ठहराव वाले पड़ाव आगे की राह रौशन करते हैं.... सुन्दर रचना

सुशील कुमार जोशी said...

बहुत सुंदर भाव ।

संध्या शर्मा said...

ऐसे ही कुछ पल बहुत ज़रूरी होते हैं जीवन में स्फूर्ति लाने के लिए .. सुन्दर रचना …

Unknown said...

क्या बात है यश जी।बहुत खूब। यही जीवन का यथार्थ है। सार्थक और महत्वपूर्ण शब्द।

Unknown said...

वाह
बहुत खूब यश जी

Anita said...

अच्छा ही है शब्दों का खो जाना पर सपनों के लिए नहीं जगने के लिए ...नये पड़ाव नहीं आते एक चक्र ही चलता रहता है इस बात को जग कर देखने के लिए...

राजीव कुमार झा said...

बहुत सुंदर.

राजीव कुमार झा said...

इस पोस्ट की चर्चा, रविवार, दिनांक :- 13/07/2014 को "तुम्हारी याद" :चर्चा मंच :चर्चा अंक:1673 पर.

Preeti 'Agyaat' said...

achchha hi hai...ek karvat lekar, so jaana, kho jaana...bhavishya ki yaatra aur naye padaavon ke sunahre sapno mein..bahut khoob !