प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

वेब सर्च (Enter your keywords to search on web)

23 August 2014

कुछ लोग -6

पूर्वाग्रहों से
घिरे हुए
कुछ लोग
सब कुछ
जान समझ कर
बने रहते हैं
अनजान
करते रहते हैं
बखान
अपनी
सोच की
चारदीवारी के
भीतर की
उसी किताबी
मानसिकता की
जो निकलने नहीं देती
देखने नहीं देती
बाहर की दुनिया में
हो रहे
बदलावों की तस्वीर....

ऐसे लोग
अपने 'वाद' में
उलझे रह कर
व्यर्थ के विवादों का
सहारा ले कर
ढहा देते हैं
तर्क की
नींव पर
बन रही
एक
खूबसूरत
इमारत को ....
बिना जाने
बिना समझे
बिखरा देते हैं
एक एक ईंट
पूर्वाग्रहों से
घिरे हुए
कुछ लोग
अक्सर कर बैठते हैं
भूल
समय की
नीचे झुकी हुई
शिखा को
शिखर समझने की ।

~यशवन्त यश©

कुछ लोग श्रंखला की अन्य पोस्ट्स यहाँ क्लिक करके देखी जा सकती हैं। 

10 comments:

Onkar said...

बहुत सुंदर

सु-मन (Suman Kapoor) said...

बहुत ही बढ़िया यश ..कुछ लोग की ये श्रृंखला बहुत अच्छी लगी

राजीव कुमार झा said...

बहुत सुंदर प्रस्तुति.
इस पोस्ट की चर्चा, रविवार, दिनांक :- 24/08/2014 को "कुज यादां मेरियां सी" :चर्चा मंच :चर्चा अंक:1715 पर.

प्रतिभा सक्सेना said...

यही विडंबना है - पूर्वाग्रह क्या-क्या गज़ब नहीं करवा देते !

Anita said...

सही कहा है..

Unknown said...

बहुत सुंदर प्रस्तुति.

Pratibha Verma said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

Unknown said...

bahut hi sunder rachna

प्रेम सरोवर said...

हृदय.स्पर्शी प्रस्तुति। मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा।

Kailash Sharma said...

वाह...बहुत सुन्दर और सटीक प्रस्तुति....