प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

वेब सर्च (Enter your keywords to search on web)

01 September 2014

शब्दों की दुनिया

जब देखता हूँ
डायरी के
भरे हुए पन्नों पर
बिखरे हुए जज़्बातों को
तो लगता है
शब्दों की यह दुनिया
कितनी विचित्र
किन्तु सत्य है ....

विचित्र इसलिये
कि मन की भित्ति पर
उभरी आड़ी तिरछी भावनाएँ
किसी प्रतिलिपि की तरह
इन पन्नों पर
हू ब हू
मेल खाती दिखती हैं .....

और सत्य इसलिये
कि इन पन्नों पर
जो दर्ज़ या दफ़न है
वह असत्य से कोसों दूर
बाहें फैलाए
कभी अपनी ओर खींचता सा
कभी आवाज़ देता सा लगता है ....

रंगबिरंगी स्याही से रंगे
डायरी के
इन चंद पन्नों पर
समाया रहता है
देश दुनिया का
पूरा इतिहास-भूगोल
खुशी-गम
बुढ़ापा और बचपन
जीवन का गूढ दर्शन ....
इसीलिए
जब देखता हूँ
बंद डायरी के
भरे हुए पन्नों पर
बिखरे हुए जज़्बातों को
तो लगता है
शब्दों की यह विचित्र
किन्तु सत्य दुनिया
बहुत आगे है
अमरत्व की कल्पना से।

~यशवन्त यश©

12 comments:

सुशील कुमार जोशी said...

बहुत बढ़िया ।

डॉ. मोनिका शर्मा said...

अर्थपूर्ण....

yashoda Agrawal said...

आपकी लिखी रचना बुधवार 03 सितम्बर 2014 को लिंक की जाएगी........
http://nayi-purani-halchal.blogspot.in आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

Preeti 'Agyaat' said...

शब्दों की दुनिया, सचमुच अद्भुत ही होती है !

Anita said...

सुंदर भाव...

Unknown said...

बेहतरीन

अरुण चन्द्र रॉय said...

bahut badhiya

Asha Lata Saxena said...

बहुत भावभीनी रचना |

वाणी गीत said...

शब्दों की यही दुनिया सत्य है !

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

शब्दों की दुनिया असीम है। उड़ान भरते जाइए।

Unknown said...

wah kya baat hai yash ji...beautifuly written lines

डॉ. जेन्नी शबनम said...

बेहद भावपूर्ण रचना...