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08 December 2014

फिर आयी एक नयी सुबह ......

बीते दिन की
बीत चुकी
यादों की
तस्वीर को
साथ लिए
फिर आयी
एक नयी सुबह 
हवा में
हल्की ठंडक
और ताजगी के साथ
उम्मीद भरी
सूरज की
किरणों से
मन की
कुछ
कहते हुए...

हो जाता है शुरू
इस सुबह का
इंतज़ार
हर दिन के
ढलने के साथ 
हर रात के
गहराने के साथ
मिटने लगते हैं
हताशा
निराशा के
बोझिल पल 
आस लिए
साथ लिए
एक रोशन
सुनहरी किरण
लो
फिर आयी
एक नयी सुबह।

~यशवन्त यश©

owo02122014

1 comment:

दिगम्बर नासवा said...

रौशनी की ये किरण जो पैगाम लाती है उसको पकड़ना जरूरी है ...
अच्छे शब्द ..