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01 January 2015

लिखते रहना है

बिखरे हुए हैं
अनेकों दृश्य
जीवन के ....

कहीं बहता पानी
ऊंचे पहाड़
मैदान
उगते डूबते
सूरज चाँद ....
अमीरी गरीबी
उठने गिरने की
सैकड़ों
कही अनकही
कहानी
कविता 
और
गीत
सरगम की धुन
भक्ति
विरक्ति
शक्ति
और संघर्ष की
गाथाओं से
भरा पूरा
इतिहास
शोषण
और
तरक्की पर टिका
विकास
विज्ञान अंधविश्वास
और
आस्था का द्वंद
अनेकों विषय
विचार
और
नयापन......

बिखरे हुए हैं यहाँ
सबके अपने शब्द
सबकी अपनी कल्पना
मन समय
और देश की
सीमाओं से परे
मौलिकता के
भूगोल के भीतर
जाते और आते
हर पल 
कुछ कुछ
कहते रहना है
लिखते रहना है
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नव वर्ष 2015 की हार्दिक शुभकामनाएँ !
~यशवन्त यश©

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