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12 March 2015

कुछ लोग -11

अपनी अभिव्यक्ति के
अनोखे शिल्प से
कुछ लोग
कभी रच देते हैं
शब्दों का
अनोखा संसार
और कभी
अपनी बातों से
अपने तर्कों से
बन जाते हैं
आकर्षण
बंध जाते हैं
एक अदृश्य डोर से
जिसके एक सिरे पर
मन
जुड़ा रहता है
भवविभोर कर देने वाली
लेखनी से
और दूसरे सिरे पर
वक्त के आसमान में
ऊंची उड़ान भरते
बिखरे अक्षरों के 
अनगिनत परिंदे
बाट जोहते हैं
फिर
किसी साँचे में ढल कर
किसी नये पन्ने पर
विश्राम पाने की ....
ऐसे लोग
अपनी खासियत से
अपने व्यक्तित्व से
लगने लगते हैं अपने से
जैसे पिछले जनम के
बिछुड़े हुए 
आ मिले हों
नये रंग
नये रूप ले कर
सुकून देने वाली
मुस्कुराहटों के साथ ...
कुछ लोग
कभी अनजान नहीं लगते
एक बार
मिल जाने के बाद।

~यशवन्त यश©

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