+Get Now!

प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

01 March 2015

शब्दों के परिंदे ......


मन के आसमान में
बेखौफ उड़ान भरते
शब्दों के परिंदे 
जाने कहाँ कहाँ 
उठते बैठते 
जाने क्या क्या 
कहते सुनते 
क्या क्या कर गुजरते हैं 
खुद भी नहीं जानते। 

मावस की रात में 
चमकते चाँद से बातें कर 
पूनम के अंधेरे में 
यूं ही उदास हो कर  
पतझड़ के फूलों की 
खुशबू में बहक कर  
अनलिखी किताब के 
कोरे पन्नों से लिपट कर ....

शब्दों के परिंदे 
कभी होते हैं 
तिरस्कृत ,पुरस्कृत 
और कभी बन जाते हैं 
उपहास का कारण 
फिर भी ढलते रहकर 
कविता,कहानी 
नाटक और गीतों में 
जीवन के खेलों में 
हार में और जीतों में 
क्या क्या कर गुजरते हैं 
खुद भी नहीं जानते।
 
~यशवन्त यश©
photo with thanks from- 

No comments:

Post a comment

कृपया किसी प्रकार का विज्ञापन कमेन्ट मे न दें।
कमेन्ट मोडरेशन सक्षम है। अतः आपकी टिप्पणी यहाँ दिखने मे थोड़ा समय लग सकता है।

Please do not advertise in comment box.
Comment Moderation is active.so it may take some time in appearing your comment here.