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23 March 2015

सपनों का समुद्र

सपनों के समुद्र मे
तैरता मन
जाने
क्या क्या ढूंढ लाता है
गहराई से
कभी सुनहरे
चमकदार
अनजाने पत्थर
जो किसी के लिए
कोई मूल्य नहीं रखते
और किसी के लिए
अमूल्य होते हैं
और कभी
निकाल लाता है
कुछ ऐसे ख्याल 
जिनका गहराई मे
कहीं दबे रहना ही
अच्छा है .....
पर शायद
अब शान्त हो जाएगा 
सपनों का समुद्र
जिसकी लहरों में
हर समय
बनी रहने वाली हलचल 
कभी थकती नहीं
रुकती नहीं
अपनी गति से
कभी बहा ले जाती हैं
अनकही बातें
और कभी
किनारे छोड़ जाती हैं
ढेर सारे किस्से ।

~यशवन्त यश©

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