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29 August 2015

ऑनलाइन रिश्ते

आभासी दुनिया के
ऑनलाइन रिश्ते
अपने भीतर
सिर्फ समेटे रहते हैं
एक आभास
कुछ होने का
जो वास्तव में
कुछ नहीं होता ।
यहाँ वहाँ बिखरे
ज्ञान विज्ञान
मनोरंजन की
बातों के बीच
छल छद्म
द्वेष स्वार्थ
और लालच
जमाए रहते हैं
कहीं गहरी पैठ
जिसका नतीजा
होते हैं
सिर्फ कुछ सिफर
जो शिखर से गिर कर
हजार टुकड़ों में बंट कर
फर्श पर
कहीं बिखरे होते हैं ।
आभासी दुनिया के
ऑनलाइन रिश्ते
कुछ ऐसे ही होते हैं।

~यशवन्त यश©

3 comments:

Unknown said...

बहुत ही बेहतरीन कविता है कुछ hindi quotes भी पढ़े

दिगम्बर नासवा said...

इसकिये ही तो इन्हें आभासी कहा जाता है ... आज हैं तो कल नहीं ...

Onkar said...

उत्कृष्ट प्रस्तुति