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08 October 2015

जो जैसा है वैसा ही रहता है........

यूं तो
झूठ,
झूठ ही रहता है
पर
कभी कभी
रंग बदल कर
सच के मुखौटे में
छिप कर
अपना सा
लगने लगता है।

यूं तो
सच,
सच ही रहता है
पर
कभी कभी
झूठ की
चादर के भीतर
खौफ में जी कर
पराया सा
लगने लगता है।

जो जैसा है
वह
वैसा ही रहता है
रूप रंग के
आवरण में
कुछ पल
छल देता है
या छला जाता है
पर फिर
वह वक़्त भीआता है
जब पर्दा हटने पर
हर अपना
पराया
और हर पराया
अपना सा
लगने लगता है। 


~यशवन्त यश©

1 comment:

mohan intzaar said...

यश जी प्रभावी रचना