प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

वेब सर्च (Enter your keywords to search on web)

10 June 2017

सब अच्छा है.....

नहीं कहीं कमी कोई
जो दिख रहा वह अच्छा है
जो कुछ अब तक सुना-सुनाया
सबने कहा वह सच्चा है।

बांध आँख पर काली पट्टी
डूब कर दिन के सपनों में
अच्छा-अच्छा अपने कहते
जो मन कहता वह सच्चा है।

लंबी चादर तान कर सोता
दिन-रात का पता नहीं कुछ
मुझ से आ कर यह मत पूछो
बाहर शोर क्यूँ शोर होता है ।

नहीं कहीं कमी कोई
जो दिख रहा वह अच्छा है
बुरा बराबर जो जो कहता
वह सब अकल का कच्चा है।

-यश ©
10/जून/2017

2 comments:

Onkar said...

सुन्दर प्रस्तुति

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (11-06-2017) को
"रेत में मूरत गढ़ेगी कब तलक" (चर्चा अंक-2643)
पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक