+Get Now!

प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

27 January 2019

होती रहेंगी अपनी बातें......

बीत जाते हैं दिन
बीत जाती हैं रातें 
रह जाती हैं केवल
कुछ अनकही बातें। 

बातें जो मैं करके खुद से 
खुद को ही समझाता  हूँ 
मन के किसी किनारे पर 
फिर भी बैठा रह जाता हूँ। 

ख्यालों का कोई अन्त नहीं 
 दोहराती खुद को जैसे रातें 
कभी गुज़र कर कहीं ठहर कर 
होती रहेंगी अपनी बातें। 

यश ©
27/जनवरी/2019 


26 January 2019

फिर भी एक गणतन्त्र हमारा.........

भेद कई होते हुए भी
एक है अभिमान हमारा
अरब से ज़्यादा होते हुए भी
एक है हिन्दोस्तान हमारा ।

माटी मीलों रंग बदलती
कोस-कोस बदलता पानी
एक संस्कृति के ढंग कई हैं
जितने  लोग हैं उतनी बानी।

कई तापों को सहकर धरती
देती जीवन है हम सबको
शून्य की जननी सबकी माता
विश्व नमन करता है इसको।

वेश अनेक परिवेश अनेक
मगर अस्तित्व स्वतंत्र हमारा
जात-धर्म और वर्ग अनेक
फिर भी एक गणतन्त्र हमारा ।
.
यशवंत माथुर ©
26/01/2019 


10 January 2019

क्यूँ भूलूँ , क्यूँ याद करूँ ......

क्यूँ भूलूँ , क्यूँ याद करूँ
क्यूँ किसी से फरियाद करूँ
आते जाते हर लम्हे को
ऐसे ही क्यूँ बर्बाद करूँ ?

माना कि कल तुम्हारा था
माना कि कल तुम्हारा है
आज के मायाजाल में क्यूँ
खुद पे अत्याचार करूँ ?

अपनी बातें कहूँ मैं किस से
परछाईं को भी नफरत मुझ से
ऐसे कैसे गहन तमस पर
क्यूँ पूरा विश्वास करूँ ?

क्यूँ भूलूँ , क्यूँ याद करूँ
क्यूँ किसी पर परिवाद करूँ
अपनी राह के हर काँटे का
ऐसे क्यूँ तिरस्कार करूँ ?

-यश©
10/01/2019

05 January 2019

गुब्बारे ......

कितनी ही साँसों को
खुद में समाए
कितने ही गमों को भुलाए
किलकारियों पर इठलाते
आसमान में
उड़ते जाते
सबकी खुशियों की
डोर से बंधे
रंग-बिरंगे
गुब्बारे
बस मुस्कुराते ही रहते हैं
खामोशी से
कुछ-कुछ
कहते ही रहते हैं।
ये गुब्बारे
धर लेते हैं रूप
कभी उल्लास की
लड़ियों का
कभी दीवारों पर सज कर
बन जाते हैं गवाह
अनगिनत महफिलों का।
अपनी साँसों के टूटने तक
ये गुब्बारे
रखते हैं महफूज
और आबाद
उन क्षणिक स्वप्नों को
जो हम बुनते हैं
दिन के उजाले में
खुली आँखों से
आने वाले हर पल को
बस यूं ही
जी लेने के लिए।
.
यश ©
05/01/2019




03 January 2019

जिंदगी तूफानी है ......

अनसुने किस्से कहीं,
कहीं अनसुनी कहानी है
ज़िंदगी तूफानी है।

बोझिल नीरस साँसें कहीं
कहीं परवाज़ सुहानी है
ज़िंदगी तूफानी है।

लहरें ऊंची उठ रहीं कहीं
कहीं सागर की शांत जवानी है
ज़िंदगी तूफानी है।

सन्नाटे की आहट कहीं
कहीं अक्स को ही हैरानी है
ज़िंदगी तूफानी है।

-यश©
03/01/2019

01 January 2019

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ!

खिलें कलियाँ खुशियों की जो
बन कर फूल न कभी मुरझाएँ।
नए वर्ष के हर एक दिन में
सभी चलें कभी न रुक पाएँ।

जीवन एक संघर्ष है माना
कम हो जाएँ पथ के काँटे।
एक थे, हम यूं  रहें एक ही
खुद को भी न खुद से बाँटें।

जलें बातियाँ दीयों की जो
रंग जीवन के सदा दिखाएँ। 
नए वर्ष के हर एक दिन में
मुस्कुराहटें ही मिलती जाएँ।
.
-यशवन्त माथुर ©
01/01/2019