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10 March 2019

मौसम ही बौराने का है

आमों के बौर आने का है 
या मौसम बौराने का है 
कोयल के कुछ गाने का है 
या फागुनी तराने का है ?

जो भी है- 
है अपने जैसा 
दर्पण के शरमाने  का है 
अक्सर अक्स भी पूछने लगता 
चेहरा कितने आने का है?

मैंने कहा-
आना तो अब चलता नहीं 
पैसा गुजरे जमाने का है 
गुदड़ी का हर लाल देखता 
सपना रुपया कमाने का है । 

जिनका कोई और नहीं 
उनको ठौर मिल जाने का है 
सभी भंगेड़ी इसी गाँव में 
मौसम ही बौराने का है। 

-यश ©
10/03/2019