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29 April 2020

कुछ लोग-50

वर्षों से
जीवन का हिस्सा बने
कुछ लोग
खोखला करने का
मौका पाते ही
बन जाते हैं
ऐसी दीमक
जो भीतर ही भीतर
भेदती जाती है
अंग-प्रत्यंग
और हमें पता ही नहीं चलता
क्योंकि हम
आँखें मूँद कर
करते रहते हैं विश्वास
सच जैसे दिखने वाले
उनके सफेद झूठ पर।

हमें बचना चाहिए
ऐसी दीमकों के
कुप्रहार से ..
हमें करना चाहिए
पहले ही कोई उपाय
कि पनप ही न पाएं
पल ही न पाएं
नहीं तो
सच सामने आते-आते
हो चुकती है इतनी देर
कि सिर्फ  बाकी रहते हैं
अवशेष
धूल में मिल कर
कहीं उड़ चुके
विश्वास के।

-यशवन्त माथुर ©
29/04/2020

1 comment:

Onkar said...

सुन्दर रचना

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