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07 May 2020

काश ! सब समझ पाते

काश ! सब समझ पाते
जो बिखरे हुए हैं
एक हो पाते।

काश! सब हो सकते दूर
अपने भूत से
भविष्य से बेफ़िकर हो
वर्तमान में जी पाते।

काश! बुद्ध फिर से आते
धरती पर और
भटकी राहों को
एक कर पाते।

काश! सब समझ सकते
मर्म एक ही सत्य का
जिसे धारण करके
धर्म पर चल पाते।

-यशवन्त माथुर ©
07/05/2020

8 comments:

  1. बहुत सुन्दर।
    बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामंनाएँ।

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  3. सत्य एक ही है समय समय पर बुद्ध पुरुष आकर इसका उद्घाटन करते आये हैं, बुद्ध पूर्णिमा पर सुंदर अभिव्यक्ति !

    ReplyDelete
  4. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शनिवार(०९-०५-२०२०) को 'बेटे का दर्द' (चर्चा अंक-३६९६) पर भी होगी
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का
    महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    **
    अनीता सैनी

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  5. " काश " ये सोच सभी की होती
    बहुत ही सुंदर सोच ,सादर नमस्कार सर

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  6. काश! सब समझ सकते
    मर्म एक ही सत्य का
    जिसे धारण करके
    धर्म पर चल पाते।
    सटीक सुन्दर और सार्थक सृजन
    वाह!!!

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  7. बहुत सुन्दर सृजन ।

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