प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

वेब सर्च (Enter your keywords to search on web)

09 May 2020

मोल-भाव न करो ....

मोल-भाव न करो फेरी वालों से 
वो भी इंसान होते हैं।  
अपने ठेले पर हमारी जरूरत का 
हर सामान ढोते हैं। 

चलते हैं पैदल और पार करते हैं 
हर लंबा रास्ता।  
कुछ ले लो बाबू जी! गुजर करना है 
खुदा का वास्ता ।

जूझ कर गालियों से गलियों में 
हफ्ता चुकाते हुए।  
समय उनको भी काटना है 
खर्चा चलाते हुए। 

पाँच-दस रुपये कम में कौन से 
काम आसान होते हैं ?
मोल भाव न करो फेरी वालों से 
वो भी इंसान होते हैं।  

-यशवन्त माथुर ©
09/05/2020

3 comments:

  1. वर्तमान समय में सार्थक, भावपूर्ण रचना।

    ReplyDelete
  2. सुन्दर प्रस्तुति
    मेरी रचना भी पढ़ें
    काफी समय बाद लिखा..
    http://merisyahikerang.blogspot.com/2020/05/blog-post.html?m=1

    ReplyDelete
  3. संवेदना जगातीं पंक्तियाँ

    ReplyDelete

कृपया किसी प्रकार का विज्ञापन कमेन्ट मे न दें।
कमेन्ट मोडरेशन सक्षम है। अतः आपकी टिप्पणी यहाँ दिखने मे थोड़ा समय लग सकता है।

Please do not advertise in comment box.
Comment Moderation is active.so it may take some time in appearing your comment here.