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22 August 2020

छोटी बात

जो सक्षम हो कर भी
असमर्थ हों
उन तथाकथित
अपनों से दूर होने की
गर आ जाए सामर्थ्य
तो धन्य हो कर
कूच कर जाऊँ
एक नयी दुनिया की ओर।

-यशवन्त माथुर ©
22082020

04 July 2020

बेमानी ही है

कुछ सवाल
अब तक
सिर्फ सवाल ही बने हुए हैं
और मैं
नहीं समझता देना
जवाब
हर उस बात का
जिसका होना
या न होना
बेमानी ही है।

-यशवन्त माथुर ©
04072020 

27 June 2020

हार

कभी-कभी
हारना अच्छा होता है
जीतने की
उम्मीद बनाए रखने के लिए
और मन के भीतर
नए कल के
दिए जलाए रखने के लिए।

-यशवन्त माथुर ©
27062020

25 June 2020

चाहत

चाहत पहचाने जाने की नहीं
चाहत सिर्फ इतनी है कि
पहचानता रहूँ सबको।

-यशवन्त माथुर ©
25062020

24 June 2020

कहानियाँ हैं.....

कई किस्से हैं यहाँ
कई कहानियाँ हैं
कहीं मजबूरियां हैं
कहीं मेहरबानियाँ हैं
उलझनें भी उलझने लगीं हैं
अब अपने ही जाल में
कहीं रोता है बचपन
कहीं उजड़ती जवानियाँ हैं।

-यशवन्त माथुर ©
24062020

23 June 2020

कुछ नहीं होगा

सिर्फ किताबें हैं यहाँ
और किताबी ज्ञान है
धरातल पर
न कुछ है
न ही होगा
सब व्यर्थ है यहाँ
कुछ नहीं होगा।

-यशवन्त माथुर ©
23062020 

22 June 2020

कल देखना फिर

कुछ यायावर हैं यहाँ
कुछ तमाशाई हैं
फ़ितरतें तो खैर
सभी की समझ आई हैं
वक्त अपना भी होगा
कल देखना फिर
है खुदा एक और
एक उसकी खुदाई है।

-यशवन्त माथुर ©
22062020

21 June 2020

ग्रहण

बदल यूं आसमान में
उमड़ते रहेंगे
कुछ गरजते रहेंगे
कुछ बरसते रहेंगे
लोग कुछ भी कहें
कहते रहें
ग्रहण तो ग्रहण हैं
लगते रहेंगे।
-यशवन्त माथुर ©
21062020 

20 June 2020

रास्ते

हम चलते जाएंगे
और
ये लंबे लंबे रास्ते
यूं ही बीतते जाएंगे
बहुत तेजी से
आखिरी पड़ाव पर आकर
कुछ बातें कह जाएंगे
कुछ अधूरी छोड़ जाएंगे।
-यशवन्त माथुर ©
20062020

19 June 2020

फर्क नहीं पड़ता

ये ठौर
मेरा है जनाब
आप आएं
न आएं
फर्क नहीं पड़ता।

-यशवन्त माथुर ©
19062020

18 June 2020

ज़िंदगी

कोई गैर
अपना बन कर
कभी दुआएं ले जाता है
और कोई अपना
गैर बन कर
सब कुछ खतम कर जाता है
यही ज़िंदगी है
यही रिश्ता-नाता है।

-यशवन्त माथुर ©
18062020

आत्महत्या

आत्महत्या
कायरता नहीं
उस स्थिति का
चरम बिन्दु होता है
जहाँ व्यर्थ लगने लगती हैं
इस विद्रूप दुनिया की
मायावी फ़ितरतें।

-यशवन्त माथुर ©
17062020

17 June 2020

एहसास है मुझको

है एहसास मुझको
कि आने वाले हैं
लौट कर
संघर्ष के बीते दिन
क्योंकि
समय का घूमता पहिया
अक्सर मुझे
ला खड़ा करता है वहीं पर
जहाँ से शुरू किया था
दो कदम आगे बढ़ना।

-यशवन्त माथुर ©
17062020

सही

जरूरी नहीं
जो उनको सही लगे
सही वही हो
सही वह भी हो सकता है
जो सबकी नज़रों में
सही नहीं हो।

-यशवन्त माथुर ©
17062020

15 June 2020

मुक्ति

जब सामने हो अंधेरा
और कोई रास्ता न हो
किसी का किसी से
जब कोई वास्ता न हो ..
तब होती है जायज ही
मुक्त हो जाने की
मुखर और
अपरिहार्य सोच।

-यशवन्त माथुर ©
15062020

14 June 2020

असलियतें

रोज सामने आती हैं
असलियतें उनकी,
नकाब ओढ़ कर 
जो अच्छे बने फिरते हैं;
मालूम है उनके मन में 
क्या है फिर भी
रोज हम उनके चेहरे 
पढ़ा करते हैं।

-यशवन्त माथुर ©
14062020

13 June 2020

समय....

समय सबका आता है
आज उनका है
कल अपना होगा
पूरा हर अधूरा
सपना होगा।

-यशवन्त माथुर ©
13062020

12 June 2020

क्या पता

ज़िन्दगी का क्या पता
कल रहे न रहे
रहने दो कुछ शब्द
कहे- अनकहे
एक छोटी सी डोर है
जब तक उड़ रही है
छू रही है आसमां
क्या पता कब
बीच से कट कर
मझधार में गिर पड़े।

-यशवन्त माथुर©
12062020

11 June 2020

तब पूछूँगा

एक प्रश्न है मन में
जो तब पूछूँगा
जब आने वाली प्रलय
गुजर जाएगी
और इस
तड़पती देह के भीतर
आखिरी दो साँसें
बाकी रह जाएंगी।

-यशवन्त माथुर ©
11/06/2020

10 June 2020

दीमक

साधारण दीमक से
कहीं ज्यादा घातक होती है
वह दीमक
जो इंसानी रूप में
हमारे आस-पास रह कर
चूसती रहती है
रिश्तों-संबंधों
और मित्रता की
रूह को।

-यशवन्त माथुर ©
10062020