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07 November 2018

दीप जलें कुछ ऐसे जग में

दीप जलें कुछ ऐसे जग में
उजियारा हर कहीं हो जाए
जन जन में उल्लास बसे
भूखा न कहीं कोई सो पाए।

मिले सद्बुद्धि हर जन-मन को
ऋद्धि-सिद्धि से युक्त सभी हों
आशा के हर गीत को गा कर
गहन निराशा से मुक्त सभी हों।

समय की बहती इस धारा में
मन का तमस गर मिट जाए
भेद-भाव से रहित दीवाली
ज्योतिर्मय सब को कर जाए।

-यश©


12 November 2015

जले बारूद की गंध ........

हर तरफ फैली
पटाखों के
जले बारूद की गंध
ऐसी लग रही है
जैसे
साफ हवा की लाश
सड़ रही हो
यहीं
कहीं आस पास।

~यशवन्त यश©

11 November 2015

खुशियाँ देते रहें सबको

दीयों की तरह
होते रहें रोशन
मन के जज़्बात
लौ की स्याही से
अंधेरे पन्नों पर
छोड़ते रहें
अपने निशान
कल, आज और कल
औरों से बेखबर
रह रह कर
बस अपनी दुनिया में
डूब कर उतर कर
नये आगाज के
इंतज़ार में
बाती की तरह
भूलते रहें,खुद को
खुशियाँ देते रहें,
सबको।

~यशवन्त यश©

23 October 2014

आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ !

इन जलते हुए
हजारों दीयों में
ढूंढ रहा हूँ
एक अपना दीया
जिसकी रोशनी
सैकड़ों अँधेरों के
उस पार
पहुँच कर
दिखा दे एक लौ
उन उम्मीदों की
जो अब तक
सिर्फ कल्पना बन कर
उतरती रही हैं
कागज़ के झीने
पन्नों पर ....
किरचे किरचे बन कर
अब तक
जो उड़ती रही हैं
हवा में
और चूमती रही हैं
धरती के पाँव
उन उम्मीदों की
एक लौ
गर पहुँच सके
उन अँधेरों के दर पर
जिनके भीतर कैद
आंसुओं का सैलाब
बेचैन है
सब्र के हर बांध को
तोड़ कर 
नयी सड़कों पर
बह निकलने को
नये एहसासों के साथ 
तब सार्थक होगी
मावस की
यह रोशन रात 
गर ढूंढ सका
हजारों
जलते दीयों की
भूलभुलैया में
एक अपना दीया
जिसकी तलाश में
कितनी ही सदियाँ
बीत चुकीं
और कितनी ही
बीतनी बाकी हैं।

~यशवन्त यश©
owo21102014519pm 

03 November 2013

मुनिया की दीवाली

सभी पाठकों को दीवाली की अशेष शुभ कामनाएँ!

आज फिर दीवाली है
आज की रात
आसमान गुलज़ार रहेगा
आतिशबाज़ी के रंगों से
और ज़मीं पर
सजी रहेंगी महफिलें
जश्न और ठहाकों की

मेरे घर के पास रहने वाली
नन्ही मुनिया
मैली से फ्रॉक पहने
कौतूहल से देखती है
इन सब
सपनीली रंगीनीयों को
हर साल
वह बढ़ती है
एक दर्जा उम्र का
मनाती है अपना त्योहार
हर दीवाली की पड़वा को
क्योंकि मावस के बाद की हर सुबह
उसे मिलता है स्वाद
ज़मीं पर बिखरे पत्तलों से चिपके
खील बताशे और
स्वादिष्ट मिठाइयों के
अवशेषों का ।

~यशवन्त यश©

03 November 2010

कैसी दीवाली मनाएंगे?

(Image curtsy-Google)

एक तरफ भूखे नंगे
जो चुन चुन अन्न खाएंगे
कूड़े के ढेरो पे बच्चे
अपना भविष्य बनाएँगे

कैसी दीवाली मनाएँगे?

फुटपाथों पे कटती रातें
सहते शीत औ गरमी को
जूठन भी मुश्किल से मिलती
तरसते तन भी ढकने को

ये कैसी समृद्धि हाय!
आज बता दो तुम लक्ष्मी माता
जन गण मन अधिनायक भारत
क्या यही विश्व में विजय पताका?

कब मुस्काएंगे  वो चेहरे
कब हिल मिल खुशी मनाएँगे
झोपड़ियों में जब दिए जलेंगे
नूतन गाथा गाएंगे

कैसी दीवाली मनाएंगे?