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14 November 2020

पटाखे तो चलाएंगे

बारूद की गंध से आसमान को
आज खूब महकाएंगे
डरे या सहमे चाहे कोई भी
पटाखे तो चलाएंगे।

ऐसी तैसी पर्यावरण की 
धुंध की चादर बिछाएंगे
सांस न ले भले कोई भी
पटाखे तो चलाएंगे।

धूम धड़ाम हो गली मोहल्ला
हल्ला खूब मचाएंगे
रोगी कोई हो घर में लेटा
पटाखे तो चलाएंगे।

करें कोई भी काम ढंग का
तो प्रगतिशील कहलाएंगे
कुतर्की होने का सुख कैसे
फिर ऐसे  ले पाएंगे?

जिसको जो कहना हो कह ले 
पटाखे तो चलाएंगे।


-यशवन्त माथुर ©

सबकी दीवाली मना पाएँ

चलते-चलते अँधेरों में 
मंजिल अपनी पा जाएँ।   
जो देखते हैं सब सपने 
पूरा उनको कर पाएँ।  

दीप बनाने वालों के घर 
दीयों से रोशन हो जाएँ।   
नयी फसल काटने वाले 
भूखे कभी न सो पाएँ।  

फुटपाथों पर रहने वाले , 
कूड़े में जूठन ढूँढ़ने वाले, 
तीखा-मीठा नया नया सा, 
सबकी तरह ही खा पाएँ।  

कितना ही अच्छा हो गर, 
सब थोड़ा थोड़ा बदल पाएँ।   
नए ढंग से, नए रंग में 
सबकी दीवाली मना पाएँ।   

(दीप पर्व सभी को शुभ व मंगलमय हो) 

-यशवन्त माथुर ©

10 September 2020

True Caller को मिलने वाली है Google से चुनौती

True Caller एक ऐसी एप्लीकेशन है जो लगभग सभी के एंड्रॉएड फोन में पाई जाती है। एक ऐसे समय में जब हर व्यक्ति व्यस्त है, सभी का प्रयास यथा संभव अनचाहे फोन कॉल्स से बचना होता है और ऐसे में True Caller जैसी एप्स जरूरी भी हो जाती हैं। 

तकनीकी विशेषज्ञ True Caller को डाटा चुराने वाली एप भी बताते रहे हैं और तमाम नकारात्मकता के बाद भी यह एप अपनी खसियतों की वजह से सबसे ज्यादा उपयोग  की जाने वाली एप बनी हुई है।   

गत मंगलवार (08 सितंबर) को गूगल ने सभी एंड्रॉएड आधारित फोन्स पर Verified Calls के एक नए  फीचर की घोषणा की है। अपने शुरुआती चरण में यह फीचर भारत, ब्राजील, मैक्सिको, स्पेन और अमेरिका में उपलब्ध कराया जाएगा और बाद में दुनिया के सभी एंड्रॉएड आधारित फोन्स में इसका अपडेट दिया जाएगा।
   

इससे पहले दिसंबर 2019 में Verified SMS नाम का फीचर गूगल द्वारा उपलब्ध कराया गया था और इसके सफल परिणामों और लोकप्रियता के बाद अब गूगल ने ट्रू कॉलर को चुनौती देने का पूरा मन बना लिया है। 

Verified Calls नाम का यह नया फीचर फोन में पहले से ही मौजूद गूगल एप के ही एक हिस्से के रूप में कार्य करेगा, यानी इस फीचर के उपयोग हेतु किसी अन्य एप को इन्स्टॉल करने की आवश्यकता नहीं होगी। 

इस फीचर के जरिए कॉलर का नाम , उसका लोगो, और व्यापारिक पहचान की जानकारी स्क्रीन पर ही मिल जाएगी जिससे निश्चित तौर पर स्पैम और फ्रॉड कॉल्स से बचा जा सकेगा। 

गूगल के आधिकारिक ब्लॉग पर उपलब्ध इस फीचर के बारे में अधिक जानकारी यहाँ क्लिक करके प्राप्त कर सकते हैं। 


-यशवन्त माथुर- 

07 November 2018

दीप जलें कुछ ऐसे जग में

दीप जलें कुछ ऐसे जग में
उजियारा हर कहीं हो जाए
जन जन में उल्लास बसे
भूखा न कहीं कोई सो पाए।

मिले सद्बुद्धि हर जन-मन को
ऋद्धि-सिद्धि से युक्त सभी हों
आशा के हर गीत को गा कर
गहन निराशा से मुक्त सभी हों।

समय की बहती इस धारा में
मन का तमस गर मिट जाए
भेद-भाव से रहित दीवाली
ज्योतिर्मय सब को कर जाए।

-यश©


12 November 2015

जले बारूद की गंध ........

हर तरफ फैली
पटाखों के
जले बारूद की गंध
ऐसी लग रही है
जैसे
साफ हवा की लाश
सड़ रही हो
यहीं
कहीं आस पास।

~यशवन्त यश©

11 November 2015

खुशियाँ देते रहें सबको

दीयों की तरह
होते रहें रोशन
मन के जज़्बात
लौ की स्याही से
अंधेरे पन्नों पर
छोड़ते रहें
अपने निशान
कल, आज और कल
औरों से बेखबर
रह रह कर
बस अपनी दुनिया में
डूब कर उतर कर
नये आगाज के
इंतज़ार में
बाती की तरह
भूलते रहें,खुद को
खुशियाँ देते रहें,
सबको।

~यशवन्त यश©

23 October 2014

आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ !

इन जलते हुए
हजारों दीयों में
ढूंढ रहा हूँ
एक अपना दीया
जिसकी रोशनी
सैकड़ों अँधेरों के
उस पार
पहुँच कर
दिखा दे एक लौ
उन उम्मीदों की
जो अब तक
सिर्फ कल्पना बन कर
उतरती रही हैं
कागज़ के झीने
पन्नों पर ....
किरचे किरचे बन कर
अब तक
जो उड़ती रही हैं
हवा में
और चूमती रही हैं
धरती के पाँव
उन उम्मीदों की
एक लौ
गर पहुँच सके
उन अँधेरों के दर पर
जिनके भीतर कैद
आंसुओं का सैलाब
बेचैन है
सब्र के हर बांध को
तोड़ कर 
नयी सड़कों पर
बह निकलने को
नये एहसासों के साथ 
तब सार्थक होगी
मावस की
यह रोशन रात 
गर ढूंढ सका
हजारों
जलते दीयों की
भूलभुलैया में
एक अपना दीया
जिसकी तलाश में
कितनी ही सदियाँ
बीत चुकीं
और कितनी ही
बीतनी बाकी हैं।

~यशवन्त यश©
owo21102014519pm 

03 November 2013

मुनिया की दीवाली

सभी पाठकों को दीवाली की अशेष शुभ कामनाएँ!

आज फिर दीवाली है
आज की रात
आसमान गुलज़ार रहेगा
आतिशबाज़ी के रंगों से
और ज़मीं पर
सजी रहेंगी महफिलें
जश्न और ठहाकों की

मेरे घर के पास रहने वाली
नन्ही मुनिया
मैली से फ्रॉक पहने
कौतूहल से देखती है
इन सब
सपनीली रंगीनीयों को
हर साल
वह बढ़ती है
एक दर्जा उम्र का
मनाती है अपना त्योहार
हर दीवाली की पड़वा को
क्योंकि मावस के बाद की हर सुबह
उसे मिलता है स्वाद
ज़मीं पर बिखरे पत्तलों से चिपके
खील बताशे और
स्वादिष्ट मिठाइयों के
अवशेषों का ।

~यशवन्त यश©

03 November 2010

कैसी दीवाली मनाएंगे?


एक तरफ भूखे नंगे
जो चुन चुन अन्न खाएंगे
कूड़े के ढेरो पे बच्चे
अपना भविष्य बनाएँगे

कैसी दीवाली मनाएँगे?

फुटपाथों पे कटती रातें
सहते शीत औ गरमी को
जूठन भी मुश्किल से मिलती
तरसते तन भी ढकने को

ये कैसी समृद्धि हाय!
आज बता दो तुम लक्ष्मी माता
जन गण मन अधिनायक भारत
क्या यही विश्व में विजय पताका?

कब मुस्काएंगे  वो चेहरे
कब हिल मिल खुशी मनाएँगे
झोपड़ियों में जब दिए जलेंगे
नूतन गाथा गाएंगे

कैसी दीवाली मनाएंगे?

-
-यशवन्त माथुर©