प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

वेब सर्च (Enter your keywords to search on web)

Showing posts with label बस यूं ही. Show all posts
Showing posts with label बस यूं ही. Show all posts

28 April 2018

28 साल

28 साल पहले, 28 अप्रैल 1990 को आगरा से प्रकाशित साप्ताहिक 'सप्तदिवा' में जब यह छपा था तब मैं लगभग 6 साल का था ( जिसे संपादक महोदय ने 7 वर्ष लिख दिया  )।
यह जो लिखा है पूरी तरह से बेतुका है लेकिन अपना नाम देख कर Motivation तो मिला ही। इस सबका पूरा श्रेय पापा को ही जाता है क्योंकि मुझे न कभी रोका न टोका जबकि कुछ लोगों ने कई तरह से demotivate करने की भी कोशिश की।
खैर तब से अब तक मैं अपने मन का लिखता और कई पत्रिकाओं व समाचार पत्रों में समय-समय पर छपता आ रहा हूँ।
मेरे इस ब्लॉग  http://jomeramankahe.blogspot.com  पर अब तक का लिखा बहुत-कुछ संग्रहित है।

-यश-

26 March 2018

मैं !

मैं !
बस अपनी कल्पनाओं में
खोया सा रह कर
अनजान सपनों से
अपने मन की
कुछ -कुछ कह कर
कभी -कभी
तांक-झांक लेता हूँ
इधर-उधर ।

मैं !
खुद को जानने की
जितनी कोशिशें करता हूँ
उतना ही अनजान बनता चला जाता हूँ
अपने अतीत और वर्तमान से ।

मैं !
बौराए आम के बागों में
चहलकदमी करता हुआ
हमराहियों के चेहरे पढ़ता हुआ
झपकती पलकों से
अनगिनत प्रश्न करता हुआ
हैरानी से देखता हूँ
जिंदगी के पहियों को
कभी घिसटते हुए
कभी आराम से चलते हुए।

मैं !
अपनी सोच के सीमित दायरे में
अपनी ही लिखी किताब पर
उकेर देता हूँ
कई और इबारतें
देखता हूँ
एक के ऊपर एक
शब्दों और अक्षरों के
जटिल पिरामिडों को
आकार लेते हुए
बस अपनी कल्पनाओं में
खोया सा रह कर
यूं ही बेमतलब की
लिखकर-कहकर
बना रहता हूँ अनजान
आने वाले
हर तूफान की आहट से।

-यश©
26/03/2018